फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Padma Awards 2020 : इन मुद्दों को आगे ले जाने पर डाॅ. अनिल जोशी को मिला यह सम्मान

Sun, 26 Jan 2020 11:58 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
अनिल प्रकाश जोशी - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

हैस्को संस्थापक पदमश्री डाॅ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि पर्यावरण पारिस्थितिकी और ग्राम्य विकास से जुड़े मुद्दों को आगे ले जाने पर उन्हें यह पुरस्कार मिला है। वह नदियों को बचाने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर लेकर गए।

विज्ञापन


जबकि सकल घरेलू उत्पाद की तर्ज पर सकल पर्यावरण उत्पाद पर काम किया। उन्होंने कहा कि पानी, जंगल, प्राण वायु आदि कितना बढ़ा है। इन सबको मिलाकर सकल पर्यावरण उत्पाद निकाला जाएगा। उत्तराखंड के विकास के बारे में उन्होंने कहा कि गांवों को यह सम्मान दिलाया जाएगा कि देश की आर्थिकी में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।

अनिल जोशी प्रोफाइल:

अनिल जोशी पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जोशी ने हिमालयन पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संस्थान (हैस्को) की स्थापना है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त हुआ।

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद ने उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया था। उन्हें जमनालाल बजाज अवॉर्ड मिला है। इसके अलावा उन्हें अशोका फेलोशिप, द वीक मैन ऑफ द एयर और आईएससी जवाहर लाल नेहरू अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। 
 

जीवन सफर 

अनिल जोशी का जन्म स्थान पौड़ी जनपद के कोटद्वार में हुआ। उन्हें स्नातकोत्तर की डिग्री बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) में हासिल की और डाक्टरेट की उपाधि इकोलॉजी में ली।

उन्होंने अपने कॅरियर की शुरूआत 1979 में कोटद्वार डिग्री कॉलेज में बतौर प्राध्यापक से की। इसके बाद हेस्को के नाम से एनजीओ बनाया। जोशी ने संस्था के माध्यम से पर्यावरण के संरक्षण और विकास के साथ कृषि क्षेत्र में शोध और अध्ययन किए। 
 
विज्ञापन

जीईपी को तवज्जो देने की है मांग 

डाॅ. अनिल जोशी सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) को तवज्जो देने की पैरोकारी कर रहे हैं। जीईपी एक ऐसी पहल है, जो संसाधनों की वृद्धि पर केंद्रित है। इसमें आर्थिकी की तर्ज पर पारिस्थितिकी संसाधनों का ब्यौरा जुड़ा है।

जीईपी के सिद्धांत के तहत ग्लेशियर, नदी और वन में सुधार का आकलन प्रदेश की आर्थिकी के हिसाब से होना चाहिए। जंगल, जल, हवा और मिट्टी को पैदा करने वाले पर्यावरण को भी उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए। इससे पारिस्थितिकी में सुधार आएगा और हिमालय की आर्थिकी में नए आयाम जुड़ेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें