राजधानी देहरादून में त्यूनी-शिमला रोड पर गैराडू के पास हादसे ने मौजूदा व्यवस्था की पोल खोल दी है। यही नहीं इस हादसे ने मानवीय संवेदनाओं को भी हिला दिया है।
बुधवार को त्यूनी-शिमला रोड पर करीब 35 लोगों से ठसाठस भरी जीप की छत से गिरकर एक अधेड़ की मौत हो गई। लोगों का आरोप है कि हादसे के बावजूद चालक ने जीप नहीं रोकी।
राहगीरों की मदद से जब तक घायल को अस्पताल पहुंचाया जाता, उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के भाई ने अज्ञात जीप चालक के खिलाफ राजस्व पुलिस को तहरीर दी है।
राजस्व पुलिस ने बताया वीरेंद्र (50) पुत्र भीम बहादुर निवासी त्यूनी नया बाजार की शादी नहीं हुई थी। वह भुटाणू में मजदूरी कर जीविका चलाता था।
जीप की छत पर बैठ गया
बुधवार को रोजमर्रा का सामान खरीदने वह त्यूनी बाजार आया था। लौटते वक्त जगह न मिलने पर एक जीप की छत पर बैठ गया। दोपहर करीब तीन बजे त्यूनी-शिमला रोड पर गैराडू के पास संतुलन बिगड़ जाने से वह सड़क पर जा गिरा।
चलते वाहन से गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आईं। वीरेंद्र के भाई पूरण बहादुर का आरोप है उसके भाई के गिरने के बाद भी जीप चालक ने गाड़ी नहीं रोकी। वाहन में करीब 30-35 लोग सवार थे।
राहगीरों ने 108 एंबुलेंस की मदद से वीरेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत करार दिया।
पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। नायब तहसीलदार माधोराम शर्मा ने बताया वाहन संख्या यूके-07टीए-6244 के चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। चालक और वाहन की तलाश की जा रही है।
यहां ओवरलोडिंग लोगों की मजबूरी
ओवरलोड जीप की छत पर सफर करना वीरेंद्र का शौक नहीं, मजबूरी थी। वह जानता था कि घर लौटने के लिए ठसाठस भरी जीप पर बैठने के अलावा कोई चारा नहीं। उसकी यही मजबूरी उसकी जिंदगी निगल गई।
ऐसे हालात से सिर्फ वीरेंद्र ही नहीं, जौनसार बावर की करीब 25 हजार आबादी जूझ रही है। जौनसार बावर के विभिन्न रूटों पर इतने लोगों की आवाजाही के लिए महज 20 प्राइवेट बसों का सहारा है।
पूरी यातायात व्यवस्था छोटे वाहनों पर टिकी है। बाकी मार्गों पर सिर्फ छोटे वाहन दौड़ते हैं, जबकि जौनसार बावर में चार प्रमुख मार्ग समेत करीब चार दर्जन से अधिक संपर्क मार्ग हैं।
बसों की कमी के चलते लोग छोटे वाहनों में ओवरलोड होकर सफर करते हैं। त्योहार सीजन में हालात और कठिन हो जाते हैं। छोटे वाहनों में लोगों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस ठूंस कर ढोया जाता है। नतीजा ज्यादातर बड़े हादसे के तौर नजर आता है।
इस कारण जोखिम में रहती जान
बदहाल सड़कें: जौनसार बावर की अधिकांश सड़कें बदहाल हैं। इनमें गड्ढे और रोड़े भी हादसों के लिए कम जिम्मेदार नहीं।
सर्पीली डगर: क्षेत्र की सड़कें बेहद घुमावदार हैं, इन पर ओवरलोड वाहन अक्सर संतुलन खोकर खाई में गिर जाते हैं।
रोडवेज बसों की कमी: क्षेत्र में रोडवेज बसों की सुविधा नहीं है। अफसर सिर्फ कागजी कार्रवाई में रह जाते हैं और जनता छोटे वाहनों में धक्के खाती है।
आरटीओ की नाकामी: ओवरलोडिंग पर अंकुश के लिए भी परिवहन विभाग कभी-कभार अभियान चलाता है। लिहाजा ओवरलोड वाहनों की दौड़ जारी है।
छह की परमिट, ठूंसते 30 से ज्यादा
मानकों के हिसाब से यूटिलिटी छह सवारियों के लिए पास है। मगर जौनसार बावर में वाहन चालक इनमें तीस से अधिक सवारियां ठूंस देते हैं। वहीं, टाटा सूमो मानकों के हिसाब से दस सवारियों के लिए पास है, लेकिन इसमें 15 तक यात्री भरे जाते हैं। बस और यूटिलिटी के किराए में 20-30 रुपये का अंतर है।
बसों की संख्या बढ़ाने के लिए परिवहन निगम को पत्र लिखा गया है। जौनसार में ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के लिए खुद एक-दो दिन में कैंप करूंगा। लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।
-एके पांडेय, एआरटीओ
बसों की कमी से ही लोगों को मजबूरी में छोटे वाहनों में ओवरलोड सफर करना पड़ता है। वाहनों की संख्या बढ़ाए बिना हल संभव नहीं है।
-कुंदन सिंह, अध्यक्ष हल्का वाहन समिति