दुर्गम विद्यालय, गंभीर रोग और उपचार एंजियोप्लास्टी। इन दोनों कारणों के आधार पर किसी भी शिक्षक का तबादला करने का प्रावधान शिक्षा विभाग के तबादला एक्ट और नियमावली में है।
विभागीय अधिकारियों की मनमानी देखिए कि इस दायरे में आने के बावजूद एक शिक्षक का स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद एक्ट के दूसरे नियम गिनाकर रोक दिया गया। दूसरी ओर, चहेतों को नियमावली दरकिनार कर धड़ल्ले से तबादले दिए जा रहे हैं।
आदेश के बाद भी नहीं हुई तैनाती
मूलत: डांडा लखौंड देहरादून निवासी 57 वर्षीय उमाशंकर थपलियाल कालसी ब्लाक के दुर्गम विद्यालय जीआईसी नगउखेत में इतिहास प्रवक्ता हैं। हृदयरोगी थपलियाल की हाल ही में एंजियोप्लास्टी हुई है।
थपलियाल ने गत वर्ष बीमारी के आधार पर तबादले के लिए आवेदन किया। 11 दिसंबर को जीआईसी गुजराड़ा में उनके स्थानांतरण का आदेश भी जारी हुआ, लेकिन अब तक उन्हें इस स्कूल में तैनाती नहीं मिल सकी है।
पैनल की जांच में भी हुई पुष्टि
दरअसल, विभागीय अफसरों ने थपलियाल के मेडिकल पर संदेह जताते हुए बीमारी के सत्यापन की बात कही। अपर शिक्षा निदेशक के आदेश के बाद छह फरवरी को राज्य चिकित्सा परिषद के सदस्यों और डाक्टरों की चार सदस्यीय टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया, जिसमें रोग की पुष्टि के साथ नियमित जांच और उपचार की रिपोर्ट दी गई।
हैरत यह है कि इसके बाद भी थपलियाल को गुजराड़ा में तैनाती नहीं मिल सकी है। दूसरी ओर, 26 फरवरी को एक शिक्षिका का अनुरोध के आधार पर तबादला कर दिया गया। प्रवक्ता आशा बुटोला को जीआईसी कांडई चमोली से जीआईसी माजरी देहरादून भेजा गया है। इससे पूर्व चार अन्य शिक्षक स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
इनका है कहना
ऊंची पहुंच वाले शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यही होना है तो पारदर्शिता के दावे करने का क्या मतलब है। यह ठीक नहीं, इस संबंध में जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
-एसएस चौहान, प्रांतीय महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ