एमडीडीए की नई आवासीय योजना के प्रति लोगों का उत्साह बहुत कम रहा। इसकी मूल वजह है गुणवत्ता और सुविधाएं। प्राधिकरण की पहले की योजनाएं गुणवत्ता और सुविधाओं के मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। लोगों में नई योजना के प्रति भी यही आशंका रही।
लाटरी निकालने के दौरान मौके पर आए राजेंद्र बिष्ट और संदीप सिंह थापा का साफ कहना था कि सबसे अधिक चिंता फ्लैटों के घटिया होने की है।
पुरानी कालोनियों की हालत खस्ता
दरअसल, लोग मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की पुरानी कालोनियों की हालत सोचकर ही घबरा जा रहे हैं। ऐसी कालोनियों के रख-रखाव न होने से सड़क, सीवर, ड्रेनेज की समस्या पैदा हो गई है। लोगों ने अवैध निर्माण भी करा लिए हैं।
कई लोगों ने बताया कि केदारपुरम की कालोनी जब एमडीडीए ने बनाई थी तो नगर निगम ने इसे लेने से इनकार कर दिया था।
हो न जए पहले वाला हालॅ
लोगों की शिकायत है कि चंदररोड, कांवली रोड और इंदिरापुरम की कालोनियों में लोग मूलभूत समस्याओं को झेल रहे हैं। इसीलिए लोग आशंकित हैं कि एमडीडीए की नई आवासीय योजना का भी पहले वाला ही हाल न हो जाए। फ्लैट की कीमत लेने के बाद प्राधिकरण डेढ़-दो साल बाद मकान देगा। तब कहीं वे ठगा सा महसूस न करें।
क्वालिटी का फर्क
बिल्डरों का कहना है कि अच्छी क्वालिटी होने की वजह से ही उनके फ्लैट महंगे हो जाते हैं। बिल्डर राज लुंबा का कहना है कि वे क्वालिटी से समझौता नहीं करते। बिल्डर नरेश चौधरी ने बताया कि एमडीडीए और उनके भवनों में क्वालिटी का फर्क है।
इनका है कहना
प्राधिकरण के पुराने प्रोजेक्ट कोई खास नहीं हैं। पहले तो इनकी किस्तें लंबे समय के लिए होती हैं, साथ ही मार्केट में उसी रेट के आसपास लोगों को फ्लैट मिल जाते हैं। इससे लोगों में बहुत उत्साह नहीं रहा।
-डीएस राणा, सीनियर आर्किटेक्ट
एमडीडीए से फ्लैट सिर्फ इसलिए खरीद रहे थे कि जमीन फ्री होल्ड होगी और उसमें कोई घपला नहीं होगा। प्रापर्टी डीलरों से खरीदी जमीन विवादित निकल आती है।
-रामकृष्ण पैन्यूली, ग्राहक