शारदा और ज्योर्ति (ज्योतिष) पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आद्य शंकराचार्य की ओर से स्थापित सिद्धांतों का पालन होना चाहिए। जनता का दायित्व है कि फर्जी शंकराचार्यों को खुद सबक सिखाएं और उनका बहिष्कार करें। देश में शंकराचार्यों की केवल चार पीठ हैं और इस समय तीन संत चार पीठों पर आसीन हैं।
मंगलवार को कनखल स्थित मठ में अमर उजाला से बातचीत में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया कि हाल ही में प्रयाग और दिल्ली में संपन्न हुई धर्म संसदों में संत समाज ने नकली शंकराचार्यों के बहिष्कार की घोषणा की है।
दो पीठों पर हैं खुद आसीन
देश की जनता को धर्म संसद के निर्देशों का पालन करना चाहिए। भगवान आद्य शंकराचार्य ने धर्म के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए उत्तर में ज्योर्ति मठ, दक्षिण में शृंगेरी मठ, पश्चिम में शारदा मठ और पूर्व में गोवर्धन मठ की स्थापना की थी।
शारदा और ज्योर्तिपीठ तक वह स्वयं आसीन हैं। दक्षिण की शृंगेरी पीठ पर स्वामी भारती पीठ और पूर्व की पुरी पीठ पर स्वामी निच्छलानंद सरस्वती विराजमान हैं। चार पीठों के इन तीन संतों के अलावा देश में और कोई शंकराचार्य नहीं है।
कोई स्वयं नहीं बन सकता शंकराचार्य
यह दुर्भाग्य का विषय है कि कई लोगों ने स्वयं को स्वयंभू शंकराचार्य घोषित कर दिया है। सनातन जगत में फैला यह भ्रम मिटना चाहिए। न्यायालय का आदेश आने के बाद बहुत कुछ साफ हो गया है।
जगद्गुरु ने कहा कि शंकराचार्य पद की एक महत्ता है। इसका उल्लेख स्वयं भगवान शंकराचार्य ने मठाम्नाय महानुशासन में किया है। देश में कोई भी व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता।