पुलिस के मुताबिक बसंत विहार क्षेत्र निवासी पार्षद अमित सिंह के घर काम करने वाले नौकर भरत थापा को दिल्ली की एक कंपनी के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। आरोप है कि भरत ने अपने साथियों के साथ मिलकर परिवार के लोगों के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। इसके बाद सभी ने घर से ज्वैलरी और नकदी चोरी कर ली। घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान पुलिस को वारदात में पांच लोगों के शामिल होने के सुराग मिले। सामने आया कि आरोपी हरियाणा नंबर की अर्टिगा कार से घटनास्थल तक पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने वाहन की जानकारी जुटाते हुए दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में आरोपियों की तलाश शुरू की।
एसपी सिटी शेखर सुयाल ने बताया कि छह अक्तूबर की रात मुखबिर की सूचना पर टीम ने दिनेश सुनार को अर्टिगा समेत दबोच लिया। तलाशी में उसके पास से चोरी की नकदी और दो मोबाइल फोन बरामद हुए। पूछताछ में दिनेश ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है और दिल्ली में टैक्सी चलाता है। टैक्सी चलाने की आड़ में वह नेपाली मूल के अन्य साथियों के संपर्क में था।
बसंत विहार की वारदात के बाद दिनेश को साथियों ने 50 हजार रुपये दिए थे। बाकी रकम चोरी का सामान बिकने के बाद देने की बात कही गई थी। पुलिस पूछताछ में भरत थापा के साथ आदित्य, अभिषेक और एलेक्स के नाम भी सामने आए हैं। चारों नेपाली मूल के बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश में पुलिस की टीमें दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में दबिश दे रही हैं।
घरों की पहले करते थे रेकी
पुलिस के मुताबिक गैंग में शामिल लोग घरेलू काम करने के बहाने घरों में प्रवेश कर पहले परिवार और घर की पूरी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद मौका देखकर साथियों को बुलाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया जाता था। दिनेश अपनी टैक्सी से साथियों को घटनास्थल तक पहुंचाने और वारदात के बाद उन्हें वापस ले जाने का काम करता था। इसके बदले उसे चोरी के माल में हिस्सा दिया जाता था।