मसूरी में भू-माफिया ने भू-राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से आईटीबीपी एकेडमी से लगी अरबों रुपए की कई सौ बीघा सरकारी जमीन बेच डाली।
इसके लिए उन्होंने आईटीबीपी एकेडमी की उस जमीन के खसरे का इस्तेमाल किया, जिस पर एकेडमी स्थित है। दरअसल आईटीबीपी ने एकेडमी को मिली 795 बीघा जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में पुराने जमीन मालिक का नाम खारिज करवाकर, विभाग का नाम दाखिल नहीं करवाया। भू-माफिया ने इसी कमी को हथियार बनाकर यह फर्जीवाड़ा किया है।
सुराग मिलने पर एसआईटी ने जांच की तो पता चला कि हिल स्टेशन पर इस जमीन को खरीदने वाले राज्य और बाहर के कई करोड़पति हैं। तीस से अधिक रजिस्ट्रियां जांच टीम को मिल चुकी हैं। इनकी संख्या और बढ़ सकती है।
जांच में स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की भूमि शाखा के हाथ तमाम दस्तावेज लगे हैं, जो भू-घोटाले में बड़े रसूखदारों और अधिकारियों की मिलीभगत को पुख्ता कर रहे हैं। जिस कार्यकाल में ये रजिस्ट्रियां र्हुईं हैं, उस दौरान पदस्थापित रहे दो कलक्टर भी इस मामले में नप जाए तो अचरज नहीं। कोई बड़ा मैनेजमेंट न हुआ तो इस मामले में जल्द ही एफआईआर दर्ज होगी।
आईटीबीपी अपने नाम करवाएगी भूमि
अमर उजाला को मिली जानकारी के मुताबिक 16 दिसंबर 2015 को सरकारी भूमि कब्जाने के एक शिकायती पत्र पर एसआईटी ने इस मामले की जांच शुरू की तो यह चौंकाने वाला खेल निकल कर आया।
एसआईटी की जांच टीम ने जब राजस्व रिकार्ड को खंगाला तो आईटीबीपी एकेडमी की भूमि (खेवट 65) को अवैध तरीके से बेचे जाने के सबूत मिले, लेकिन खरीददारों ने जिस भूमि पर कब्जे लिये वह वन भूमि या अन्य सरकारी भूमि है।
राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से उस रघुप्रताप की जमीन बताकर रजिस्ट्रियां होती रहीं। इनमें से कई खरीददार तो फर्जी तरीके से बेची गई इस सरकारी भूमि पर निर्माण भी कर चुके हैं।
आईटीबीपी को एसआईटी ने खेवट 65 की भूमि, जिस पर उनकी एकेडमी स्थापित है, अपने नाम करवाने के लिए पत्र भेज दिया है। कमांडेंट आईटीबीपी एकेडमी अब भूमि को अपने नाम करवाने के लिए जिलाधिकारी से पत्राचार करेंगे।
एसआईटी (भूमि शाखा) जमीनों की धोखाधड़ी से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। आप जिस जमीन से संबंधित मामले की जानकारी चाहते हैं, ऐसे एक मामले की जांच मेरे संज्ञान में आई तो थी, मगर एकदम से उसकेबारे में ज्यादा कुछ बता नहीं सकता।
- संजय गुंज्याल, आईजी