चार पीसीसी अफसरों ने उत्तराखंड छोड़ने से पहले ग्राम समाज और गोल्डन फारेस्ट की जमीन अवैध तरीके से बिल्डरों और रियल इस्टेट के कारोबारियों के नाम कर दी।
इसके बाद उत्तर प्रदेश में जाकर नौकरी ज्वाइन कर ली। जांच शुरू होने के बाद घपलों की परतें उधड़ी हैं तो यह खुलासा हुआ है। डीएम रविनाथ रमन ने कहा कि सरकारी और विवादित जमीन देने में विधिक प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।
चालंग गांव की भूमि पैमाइश रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर जिला प्रशासन ने ग्राम समाज और गोल्डन फारेस्ट की भूमि पर अवैध कब्जों की छानबीन शुरू की। जांच में गड़े मुर्दे उखाड़े जाने लगे हैं तो उनके पेट से राज निकलने लगे हैं।
ग्राम समाज और गोल्डन फारेस्ट की भूमि वर्ष 2007 में एसडीएम स्तर के अधिकारियों ने बिना विधिक खानापूरी किए बिल्डरों और रियल इस्टेट कारोबारियों को दे दी थी।
जिन अफसरों के नाम उजागर हुए हैं, उनमें चार पीसीएस अफसर इस वक्त यूपी में तैनात बताए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने अभी नामों का खुलासा नहीं किया है। जांच पूरी होने पर साक्ष्यों के साथ उनके खिलाफ दून में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इन अफसरों के साथ और भी लोगों पर गाज गिरेगी।
आशंका से डरे कई लोगों ने भागदौड़ शुरू कर दी है। चर्चा है कि मोटी रकम लेकर बिल्डरों को बिना विधिक कार्रवाई पूरी किए जमीन दी गई है। डीएम रमन ने बताया कि जांच में मिला है कि जमीन देने से पहले किसी पक्ष का बयान नहीं लिया गया।
अनापत्ति प्रमाण पत्र देने वाले भी फंसेंगे
अफसरों ने गलत तरीके से बिल्डरों को जमीन तो दी, लेकिन ऐसे विभागों पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन्होेंने भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है। डीएम ने कहा कि उनसे भी पूछा जाएगा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र किस आधार पर दिया गया है।
कागजात पर ग्राम समाज और राजस्व विभाग के पास भूमि नहीं होने पर शासन ने आंखें तरेरनी शुरू कर दी है। इससे अफसरों की सिट्टीपिट्टी गुम है। अभी कई सरकारी कार्यालय खुलने हैं, जिन्हें भूमि मुहैया कराने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की है। इसके चलते विभाग ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है।