जब बीएसएनएल की केबल डलेगी तो सड़क पूरी खुदेगी, लिहाजा बीएसएनएल के इन अधिकारी के घर के बाहर भी सड़क किनारे खुदाई कर दी गई।
काम करने वाली एजेंसी के कारिंदे इतनी जिम्मेदार हैं कि वह काम के मामले में सबको एक निगाह से देखते हैं। ऐसे में अधिकारी के घर के बाहर भी खुदाई कर गड्ढा छोड़ दिया गया।
जब भी कोई अधिकारी के पास पहुंचता है तो वह इस गड्ढे की कहानी सुनाने लगते हैं। कहते हैं कि काम सबका एक तरह से ही होगा। अधिकारी हो या कर्मचारी या कोई और।
ऐसे में समस्या दूर कराने जाने वाले समस्या का हल तो पाते नहीं, हां, अधिकारी के प्रति जरूर लेकर लौटते हैं।
शिकायत हो गई अब चाय-पानी पिलाओ
सोमवार को देहरादून के रेस्टकैंप क्षेत्रवासी सीवर लाइन संबंधी शिकायत लेकर पेयजल निगम कार्यालय पहुंचे।
लोगों का कहना था कि क्षेत्र में हो रहा सीवर लाइन का काम गुणवत्तापरक नहीं हो रहा है। उन्होंने काम गुणवत्तापरक कराए जाने सहित अन्य मांगों को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारियों को घेरे रखा।
अधिकारियों ने भी बात निपटाते हुए चपरासी से कहा कि लोगों को चाय-पानी पिलाओ। लोगों से बोले कि अजी बहुत हो गई शिकायत, अब जरा चाय-पानी पीजिए, आराम से बैठिए।
धोखेबाज मानसून
जिस तरह घायल की गति केवल घायल समझता है, उसी तरह मौसम विभाग के पूर्वानुमान से जख्मी लोगों की हालत भी उनसे बेहतर कोई नहीं जानता।
राजधानी देहरादून में बच्चों के स्कूल सोमवार से खुल गए। कई ऐसे अभिभावक थे, जिन्होंने मौसम विभाग की तरफ से जारी बारिश का पूर्वानुमान पढ़ा और बच्चों को स्कूल के लिए तैयार ही नहीं किया।
बादल भी छाए थे, उम्मीद थी कि खूब बरसेंगे। बच्चे भी बादल देखकर खुश थे। लेकिन ऐन मौके पर बादल दगा दे गए और बच्चे, अभिभावक सभी ठगे से रह गए।
अब वह मौसम विभाग वालों को कोस रहे हैं। बेचारे मौसम वाले भी क्यों करें। इंद्रदेव कोई उनके वश में थोड़े ही हैं।