यह है ट्रिपल टेस्ट
किसी भी पंचायत में ओबीसी आरक्षण का फॉर्मूला तय करने को ट्रिपल टेस्ट किया जा रहा है। इसका पहला बिंदु यह है कि उस निकाय या ग्राम पंचायत में स्थानीय तौर पर ओबीसी की आबादी कितनी है। उन्हें आरक्षण की जरूरत है या नहीं? अगर आबादी कम भी है तो ओबीसी का प्रतिनिधित्व कितना है? तीसरा यह देखा जाएगा कि एससी-एसटी का कुल आरक्षण मिलाने के बाद आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न होगा। लिहाजा, एससी-एसटी आरक्षण के बाद ओबीसी से 50 प्रतिशत का आंकड़ा पूरा किया जाएगा।
पहाड़ की ग्राम पंचायतों में शून्य हो सकते हैं पद
पर्वतीय जिलों में तमाम ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जहां ओबीसी आबादी नहीं है। इसके चलते हरिद्वार और ऊधमसिंह जिलों में ओबीसी की सीटें 50 प्रतिशत के मानक से अधिक हो रही थीं। ट्रिपल टेस्ट के बाद जहां ओबीसी होंगे, वहीं आरक्षण की राह खुलेगी। जहां ओबीसी की आबादी नहीं है वहां इस वर्ग के पद खत्म हो सकते हैं।
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हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ट्रिपल टेस्ट के आधार पर ओबीसी सर्वेक्षण किया गया था। इस आरक्षण के फार्मूले पर ही अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ट्रिपल टेस्ट होगा। इसी से ओबीसी आरक्षण तय होगा। नगर निकायों के बाद ग्राम पंचायतों में एकल सदस्यीय आयोग सर्वे कराएगा। - नितेश झा, सचिव, पंचायतीराज