उत्तराखंड में विभिन्न मांगों से संबंधित शासनादेश न आने पर नर्सों ने भूख हड़ताल की धमकी दी है। उत्तराखंड नर्सेस संघ की अध्यक्ष अंजना भौमिक ने बताया कि शासन के रवैये से नर्सें मायूस हो गई हैं।
अगर सोमवार तक शासनादेश नहीं आया तो भूख हड़ताल शुरु कर दी जाएगी। उन्होंने धमकी दी कि मायूस होकर नर्सें सामूहिक आत्महत्या सरीखा कदम भी उठा सकती हैं।
अभी तक शासनादेश जारी नहीं
संघ की अध्यक्ष अंजना भौमिक ने फिर वही बता दुहराई कि नर्सें अपनी संख्या के लिहाज से एक शिफ्ट में काम कर रही हैं। इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी कई बार आश्वासन दे चुके हैं। लेकिन अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुआ है। शासनादेश जारी होने के बाद ही दो शिफ्टों का कार्य बहिष्कार वापस लिया जाएगा।
उधर, सरकार एस्मा लागू करने की हिम्मत जुटा नहीं पाई जबकि नो वर्क नो पे का नर्सों के आंदोलन पर कोई असर नहीं दिख रहा है। डीजी हेल्थ डा.जेएस पांगति की नर्सिंग एसोसिएशन के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही। सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है, ऐसे में नर्सों की मांगों को लेकर फैसला सत्र के बाद तक टलता दिख रहा है।
आश्वासन से मुकरा शासन
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के आश्वासन के बाद अक्टूबर में शासन ने नर्सों को आश्वस्त किया था कि जल्द मांगों के समर्थन में शासनादेश जारी किए जाएंगे। लिखित में आश्वासन के बाद नर्सें मानी, लेकिन उनकी मांगों पर कोई आदेश जारी नहीं किया गया।
जिन मांगों पर सहमति बनी थी उसमें नर्सिंग भत्ते में केंद्र वृद्धि कर चुका है, लेकिन राज्य में इसे लागू नहीं किया गया। नर्सों ने पदोन्नति से निदेशक पद की मांग रखी थी, जिसपर संयुक्त निदेशक पद तक पदोन्नति का प्रस्ताव डीजी कार्यालय से शासन में गया है।