हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश के करीब 72 हजार शिक्षकों को 24 घंटे में काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को निर्देश दिया किहड़ताल वापस न लेने पर शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर उनके स्थान पर अन्य योग्य बेरोजगारों की नियुक्ति करें।
उधर, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षक हड़ताल तोड़ने को तैयार नहीं है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने नो वर्क नो पे के निर्देश जारी कर दिए हैं।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज लखचौरा ने शुक्रवार को न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर कहा कि राज्य में लगभग 72 हजार शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 12 सितंबर से हड़ताल पर हैं, जिससे छात्रों के पठन-पाठन में परेशानी हो रही है। जबकि शिक्षक हड़ताल नहीं कर सकते हैं। उनकी हड़ताल असंवैधानिक है।
24 घंटे में वापस नहीं आए तो नई भर्ती करे सरकार: HC
नैनीताल उच्च न्यायालय
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खंडपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद सरकार को आदेशित किया कि शिक्षकों से कहा जाए कि वे अपनी हड़ताल वापस लें। यदि वे 24 घंटे में काम पर वापस नहीं आते हैं तो उनकी सेवाएं समाप्त कर योग्य बेरोजगारों को नियुक्त करें। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तिथि नियत की है।
उधर, शिक्षक हड़ताल के चलते शुक्रवार को भी पांच हजार से अधिक स्कूलों में ताले लटके रहे। जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लेकर जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। वहीं, राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े 21 हजार से अधिक शिक्षकों का कार्य बहिष्कार जारी रहा।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद वे हड़ताल से लौटने को तैयार नहीं है। इसके चलते शिक्षा विभाग ने सख्त रवैया अपनाते हुए नो वर्क नो पे के निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा महानिदेशक रंजना की ओर से जारी निर्देश में कार्य बहिष्कार करने वाले शिक्षकों की हर दिन की सूची महानिदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कोर्ट के फैसले के बावजूद शिक्षक आंदोलन पर अड़े
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मांगों को लेकर राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े शिक्षक तो कार्य बहिष्कार कर ही रहे हैं, शुक्रवार को जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों ने भी सामूहिक अवकाश लेकर जिला मुख्यालयों पर रैली निकाली और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को 21 सूत्री ज्ञापन भेजा। संगठन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी उमेश चौहान ने कहा कि मांगें न मानी गईं तो 23 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे। उधर, कोर्ट के फैसले के बावजूद राजकीय शिक्षक संघ आंदोलन से लौटने को तैयार नहीं है।
कोर्ट ने पूछा है कि शिक्षकों की हड़ताल के मामले में क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका पालन कराया जाएगा। मामले में विभाग की ओर से नो वर्क नो पे के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
-डॉ. रणवीर सिंह, अपर मुख्य सचिव
हाईकोर्ट का फैसला राज्य सरकार के लिए है। सरकार मामले का हल निकाले। सरकार यदि नए लोगों को रखना चाहती है तो रखे। संगठन इस मामले में विधिक राय लेकर कोर्ट जाएगा।
-राम सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ