इन दिनों देशभर में डेंगू का प्रकोप है। अस्पतालों में डेंगू के मरीजों का जमावड़ा लगा है। इस सबके बावजूद डेंगू के इलाज में अफवाहों का दौर भी जारी है।
डेंगू के चलते गिलोए, पपीते के पत्ते, एलोवेरा और बकरी के दूध की मांग व दाम भले ही बढ़ गए हों, मगर एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि इन चीजों से डेंगू से लड़ने में मदद मिलती है। डॉक्टरों ने लोगों को इनके चक्कर में नहीं पड़ने का सुझाव दिया है।
नई दिल्ली से प्राप्त खबर के अनुसार, भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि अभी तक इस पर अध्ययन नहीं किया गया है। यही वजह है कि कोई भी डॉक्टर डेंगू के मरीज को इसका सेवन करने की सलाह नहीं देता। एम्स चिकित्सकों का कहना है कि आयुष मंत्रालय को इस पर अध्ययन कराना चाहिए।
एम्स में बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और वायरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों ने एक सुर में कहा कि बकरी के दूध और पपीते के पत्ते के जूस से डेंगू मरीजों कोई लाभ नहीं मिलता है।
हालांकि, चिकित्सकों ने यह भी कहा कि संभव है किसी मरीज को इसके सेवन से लाभ मिला हो, लेकिन इस आधार पर सभी मरीजों को इसके सेवन की सलाह नहीं दी जा सकती है, क्योंकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।