उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कथित स्टिंग आपरेशन की सीबीआई जांच की जमीन उसी दिन तैयार हो गई थी, जिस दिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने पूरे प्रकरण की शीर्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी।
यह भी चर्चा थी कि भट्ट का सीबीआई जांच की मांग करना पार्टी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। सीबीआई जांच शुरू होते ही राज्य की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देकर केंद्र को कोसा और भाजपा ने इसे उचित कदम करार दिया।
कब गई चिठ्ठी, किसी को खबर नहीं
सीबीआई जांच का आदेश कब किया गया, किसी को भनक तक नहीं लगी। राजभवन का आदेश होते ही शासन ने अपनी तरफ से अधिसूचना जारी कर सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। इसके बाद चिट्ठी कब केंद्र गई और केंद्र ने कब सीबीआई को प्रारंभिक जांच का इशारा किया, यह खबर तब लगी जब शुक्रवार को स्टिंग करने वाले पत्रकार उमेश कुमार शर्मा सीबीआई के बुलावे पर सीडी सौंपने निदेशालय पहुंचे।
करीब एक महीने बाद स्टिंग आपरेशन के सीबीआई को सौंपे जाने से हलचल और तेज हो गई है। हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर अभी बयानबाजी भर की है, लेकिन यह भी हो सकता है कि यदि बात बिगड़ती दिखी तो फिर इस मुद्दे को भी जनता के बीच ले जाया जाएगा। इधर, शासन में ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी अधिकारी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं है।