असहमति के इस दौर में राजधानी देहरादून के पास कालसी विकासखंड के बिसोई गांव के लोगों ने सहमति की मिसाल पेश की है।
निर्विरोध प्रधान चुना गया
कुर्सी के लिए लड़ने-झगड़ने वाले लोग इस गांव के लोगों की परंपरा से बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह ऐसा गांव है जहां आजादी के बाद से आज तक कभी ग्राम प्रधान के लिए मतदान नहीं हुआ।
लोगों ने आपसी रजामंदी से अपना प्रधान चुना है। इस पर भी आपसी सहमति से गांव के 48 वर्षीय चरण सिंह चौहान को निर्विरोध प्रधान चुना गया है।
करीब 328 मतदाताओं वाले बिसोई गांव में आज तक रजामंदी से ही ग्राम प्रधान का चयन किया जाता है। ग्राम स्याणा निवासी गजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि एक पद पर दो लोगों के खड़े होने से फिजूलखर्ची बढ़ती है। आपसी सद्भाव भी बिगड़ता है। इस वजह से गांव वाले आपसी सहमति से प्रधान का चुनाव कर लेते हैं।
इस पर युवा प्रधान
बिसोई गांव के लोग आज तक प्रधान पद पर किसी 60 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति को ही प्रधान चुनते आ रहे थे लेकिन इस बार 48 साल के चरण सिंह चौहान को अपना प्रधान चुना है।
ये रह चुके हैं प्रधान
गांव वालों ने इससे पहले झूलो देवी, सुरेंद्र सिंह चौहान, जगत सिंह चौहान, शमशेर सिंह चौहान, वीरेंद्र सिंह चौहान को निर्विरोध प्रधान चुन चुके हैं।