सूखा और पेयजल संकट के मद्देनजर केंद्र ने शहरी क्षेत्रों में बोर वेल, ट्यूब वेल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने के लिए शासन हाउस टैक्स में रिबेट का प्रावधान करने जा रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद शासन ने विभागों को पत्र जारी कर दिया है। पानी के संकट को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में नए ट्यूबवेल और बोरवेल खोदे जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही जलसंस्थान और पेयजल निगम को पानी की बर्बादी रोकने के लिए पाइप लाइन की लीकेज शून्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन को केंद्रीय सचिव राजीव गोबा का पत्र मिलने के बाद मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने इस संबंध में संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। केंद्र ने प्रदेश शासन को यह भी मशविरा दिया है कि मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज-2016 के मद्देनजर भवनों का निर्माण कराया जाए। इसके तहत भवनों के निर्माण के समय ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कर दी जाए। साथ ही जो पुराने भवन बने हुए हैं, उनमें भी वर्षा जल संचयन का सिस्टम निर्मित किया जा सकता है।
इसके साथ ही सरकारी और गैर सरकारी खाली पड़ी भूमि पर भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। केंद्र सरकार से मिले पत्र में अरबन लोकल बॉडीज के संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि यह संस्थाएं और संगठन वर्षा जल संचयन के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान शुरू करें, जिससे लोग जागरूक हों।
जल संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र ने दिशा-निर्देश दिए हैं कि पानी की बर्बादी को तो रोका ही जाए, साथ ही बारिश के पानी से सूख रहे भूगर्भ स्रोतों को रिचार्ज करने की व्यवस्था की जाए।