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ऐसे तो डेंगू बीमारी से बच चुके नौनिहाल,

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मानसून के दस्तक देते ही फिलहाल डेंगू का खतरा नहीं है, लेकिन जिस तरह से सरकारी संग निजी और सरकारी स्कूलों में लापरवाही बरती जा रही, उसे देखते हुए स्कूली बच्चों को डेंगू का खतरा तय है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों को भेजी गई एडवाइजरी के बावजूद ज्यादातर स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों को बीमारी से बचाने को लेकर कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए हैं।
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जिला मलेरिया अधिकारी सुभाष जोशी की मानें तो स्कूली बच्चों को डेंगू बीमारी से बचाने को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी के मार्फत कई स्कूलों को पत्र भेज अनुरोध किया गया कि बच्चों को डेंगू से बचाने को लेकर स्कूलों की खिड़कियों और दरवाजों पर न सिर्फ जाली लगवाई जाए, बल्कि प्रार्थना सभाओं के जरिए जागरूक किया जाए कि आखिरकार डेंगू बीमारी से कैसे बचें। जोशी के मुताबिक, स्कूल में जो भी बच्चे पढ़ने आ रहे, वे पूरी आस्तीन की कमीज पहनने के साथ ही फुल पैंट पहनकर आएं, ताकि डेंगू बीमारी से बचा जा सके।
स्कूलों के आसपास सफाई के साथ जमा पानी को तत्काल हटाएं, ताकि जमा पानी में डेंगू के लार्वा न पनपे। जहां एक ओर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी बीमारी को नियंत्रित करने को लेकर तमाम कदम उठा रहे। वहीं, राजधानी के तमाम निजी और सरकारी स्कूल हैं, जहां बीमारी को रोकने को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। कई स्कूलों में बच्चे अभी भी हाफ पेंट, आधी आस्तीन की कमीज पहनकर आ रहे हैं। जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि इस बाबत जल्द ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी।
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घर से बाहर जब भी निकलें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर निकलें, नालियों में पानी कतई न जमा होने दें। यदि पानी जमा है तो उसमें जला हुआ मोबिल आयल डाल दें, रात के समय मच्छरदानी लगाकर सोएं, घर की छत पर यदि कूड़ा है तो उसे पूरी तरह साफ कर दें, कूलर में पानी है तो उसे निकाल दें। कूलर को अच्छी तरह से सुखा लें, यदि बुखार के साथ ही तेज बदन दर्द हो रहा तो कुशल विशेषज्ञ से जांच कराएं।
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