निर्जला एकादशी पर सोमवार को 13 साल बाद शुभ संयोग बन रहा है। वार के साथ ही नक्षत्र का मिलन और तुला राशि पर चंद्रमा का होना बेहद खास माना जा रहा है।
ज्योतिषियों की माने तो यह दिन व्रत-पूजन के लिए दोगुना फल देने वाला है। निर्जला एकादशी पर सोमवार को लोग निर्जला व्रत रख पूजन आदि करते हैं तो दूसरी ओर लोगों को जल पिलाकर पुण्य कमाते हैं।
बेहद शुभ है निर्जला एकादशी
एकादशी रविवार शाम 5 बजकर 8 मिनट से लग चुकी है तो जो सोमवार शाम 5:10 बजे तक रहेगी। जिस दिन उदय-कालीन तिथि में एकादशी होती है, उसी दिन एकादशी का पर्व मनाया जाता है।
इस हिसाब से सोमवार को ही निर्जला एकादशी मनाई जाएगी। उत्तराखंड विद्वत सभा के आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि इस बार चित्रा नक्षत्र, सोमवार, वारियान योग, वृष राशि का सूर्य और तुला राशि का चंद्रमा है।
यह बेहद शुभ है। ठीक यही संयोग वर्ष 2000 में बना था। गढ़ी कैंट शनि धाम के डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि भीमसेन ने भी यह व्रत किया था।
इस व्रत को पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इसमें पूरे दिन लोग पानी ग्रहण नहीं करते, एकादशी के अगले दिन ही व्रत खोला जाता है।
ऐसे करें व्रत
व्रत के दौरान:
भगवान विष्णु का पूजन
जल-अन्न का दान
गरीबों को भोजन कराना
गंगा दशहरा पर पूजा
रविवार को गंगा दशहरा पर शहर के मंदिरों में विशेष पूजा हुई। इस मौके पर लोगों ने स्नान-दान आदि किया। चंद्रबनी स्थित गौतम कुंड में पूजा और विशेष आरती की गई।
तिलक रोड स्थित प्राचीन गंगा मंदिर में विशेष पूजा की गई। इसके अलावा गीता भवन, राधा-कृष्ण मंदिर, लक्ष्मी-नारायण मंदिर सभी जगह गंगा पूजा की गई।