लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने पंचायत चुनाव से पूरी तरह से किनारा कर लिया है। पंचायत चुनाव के किसी भी स्तर पर कांग्रेस अपने अधिकृत उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुरुआत में ही पार्टी अपील की थी कि निचले दो स्तरों के चुनाव में पार्टी दूरी बनाए रखे। बावजूद प्रदेश संगठन ने पर्यवेक्षक बनाकर चुनावी जमीन तलाशने की कोशिश की जो मुकिश्लों भरी दिखी।
दरअसल एक सीट पर कांग्रेस समर्थित दो से चार उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल कर दिया है ऐसे में एक को अधिकृत कर अन्य को मैदान से हटाना बहुत कठिन था।
लेकिन प्रत्याशियों की कर सकेंगे मदद
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना ने एक अधिकृत बयान में बताया कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य द्वारा पंचायत चुनाव के सम्बन्ध में जिलों में भेजे गये पर्यवेक्षकों एवं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से पंचायत चुनाव के संबंध में विस्तृत चर्चा करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।
उनका कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कांग्रेस पार्टी किसी भी स्तर पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी।
धस्माना का कहना है कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी के जिला अध्यक्षों एवं पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया है जहां पार्टी का एक प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा हो या प्रत्याशी पर आम सहमति हो वहां उनको जिताने के लिए आवश्यक सहायता कर सकते हैं, किन्तु कोई भी प्रत्याशी पार्टी की ओर से अधिकृत नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की सलाह आई काम
पंचायत चुनाव के पहले प्रदेश कार्यालय में पंचायत को लेकर बुलाई बैठक में ही मुख्यमंत्री स्थिति भांप गए थे और उन्होंने पार्टी से निचले दो स्तरों पर दूरी बनाए रखने की अपील की थी।
बावजूद पार्टी ने पर्यवेक्षक बनाकर जमीन टटोलनी चाही तो नाकामी हाथ लगी। कांग्रेस इस चुनाव में भी पिछड़ गई है जबकि भाजपा ने हाल ही अधिकृत उम्मीदवारों की सूची जारी की है।
हालांकि कुछ जगहों पर विवाद के चलते भाजपा ने भी आखिर समय में अधिकृत उम्मीदवारों के नाम रोक दिए हैं।