अभिभावक और आश्रम कर्मचारी हुए बरी
जिस पीड़िता के साथ सुचित नारंग ने दुष्कर्म किया था उसे लखनऊ के एक आश्रम से लाया गया था। उस वक्त इस छात्रा की अभिभावक तेजी कौर थी। जबकि, पूर्णिमा लखनऊ के आश्रम की कर्मचारी। इन दोनों पर भी मामले को दबाने का आरोप लगा था। कोर्ट ने इन दोनों के मामले में अलग से विचार किया लेकिन उनके खिलाफ कोई साक्ष्य न मिल पाने से उन्हें बरी कर दिया गया।
बचाव की ओर से कुल दो गवाह हुए पेश
इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से कुल दो गवाह पेश किए गए थे। बचाव ने सजा के प्रश्न पर तर्क दिया कि शिक्षक सुचित नारंग देख नहीं सकते हैं। लिहाजा उन्हें कम से कम सजा दी जाए। लेकिन, अभियोजन ने इस मामले में मजबूत तर्क प्रस्तुत किए। अभियोजन की ओर से कहा गया कि सुचित के प्रति दया का कोई भाव नहीं होना चाहिए। क्योंकि, जिस छात्रा के साथ उसने दुष्कर्म किया वह भी देख नहीं सकती थी।