उत्तराखंड सरकार अभी तक भागीरथी नदी के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र से संबंधित जोनल मास्टर प्लान नहीं तैयार कर सकी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इसके लिए सरकार को जमकर फटकार लगाई है। एनजीटी ने अपने निर्देश में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार के संबंधित एडीशनल चीफ सेक्रेट्री और पर्यावरण मंत्रालय के संबंधित अधिकारी से जवाब-तलब किया है।
ग्रीन बेंच ने अधिकारियों से पूछा है कि वे बताएं कि अब तक पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने लीगल एड कमेटी, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान बेंच ने इसी मामले में 5 अगस्त 2015 को दिए निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि हम यह समझ पाने में असफल हैं कि मॉनिटरिंग कमेटी ने मास्टर जोनल प्लान को प्रारूप देने के लिए बीते महीनों में क्यों नहीं बैठकें कीं और प्रयास किए। यह पूरी तरह से ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन है। कमेट इको सेंसेटिव जोन को लेकर संवेदनशील नहीं है।