दैवी आपदा की जद में आए गांवों का एक और सर्वे होगा। इसके लिए भूतत्व और खनिकर्म विभाग को निर्देशित कर दिया गया है। यह सर्वे पिछले दिनों जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में शामिल 60 गांवों का होगा। इस बार सर्वे में संस्कृति, कृषि, सामाजिक रीति रिवाज और आर्थिकी के साधनों को भी शामिल किया जाएगा।
ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि किसी भी गांव के विस्थापन के लिए केंद्र सरकार की 2008 की पुनर्वास नीति के तहत ये विषय जरूरी हैं और विस्थापन का पैसा भी केंद्र को ही देना है। पहले के सर्वे में यह शामिल नहीं था। इसलिए पिछले पांच सालों से गांवों की संख्या बढ़कर 341 हो गई और केंद्र ने कुछ नहीं दिया।
उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों ने कुल 60 गांवों को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में शामिल करते हुए विस्थापित करने की संस्तुति की है। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अपने अपने जनपद से 10-10 गांव ऐसे चिह्नित करें, जिन्हें सबसे पहले विस्थापित करने की जरूरत है।