गंगा के दोनों किनारों से 100 मीटर तक निर्माण की पाबंदी का निर्देश नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने जारी तो कर दिया है, लेकिन इसे जमीन पर उतारने में शासन के हाथ-पैर फूल रहे हैं। अगर इस निर्देश पर अमल किया गया तो सालों से गंगा किनारे बसे 21 शहरों पर संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा लगभग चार सौ गांव इसकी चपेट में आ जाएंगे। गोमुख से हरिद्वार तक अधिकांश आबादी गंगा नदी के किनारे ही बसी हुई है।
गोमुख से हरिद्वार तक गंगा की लंबाई तकरीबन 500 किमी है। हरिद्वार, ऋषिकेश के अलावा देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, कीर्तिनगर, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ गंगा किनारे ही आबाद हैं। कुछ गांव और कस्बे ऐसे भी हैं जिनका आकार अगर गंगा किनारे नापा गया तो सौ मीटर में सरहद ही पार हो जाएगी।
एनजीटी की चैंबर मीटिंग में इस निर्देश के अनुपालन में आ रही दिक्कत अफसरों ने साफ कर दी। वन संरक्षक एसपी सुबुद्धि ने बताया कि चैंबर मीटिंग में एनजीटी चेयरमैन के समक्ष यह मसला रखा गया।