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केदारनाथ हेली सेवा पर एनजीटी ने मांगा जवाब

Tue, 25 Aug 2015 02:42 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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केदारनाथ वन्य जीव विहार में हेलीकॉप्टर कंपनियों की मनमानी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने सोमवार को उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर दिया। साथ ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नेशनल और स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड समेत अन्य को भी नोटिस जारी किया गया। ट्रिब्युनल में अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी।
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वन प्रभाग गोपेश्वर के उप वन संरक्षक आकाश कुमार वर्मा ने मार्च 2013 में प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक को रिपोर्ट भेजी थी। इसमें बताया गया था कि केदारनाथ वन्य जीव विहार के ऊपर से उड़ान के लिए हेलीकॉप्टर कंपनियों ने एनओसी नहीं ली है। हेलीकॉप्टरों के शोर से शेड्यूल-1 के कस्तूरी मृग, हिमालयन गिद्ध समेत अन्य पशु-पक्षी तथा वनस्पतियां प्रभावित हो रही हैं।

अमर उजाला ने प्रकाशित की थी रिपोर्ट
उप वन संरक्षक वर्मा की इसी रिपोर्ट के आधार पर अमर उजाला ने ‘हेलीकॉप्टरों के शोर से ‘घर’ छोड़ने को मजबूर हो रहे केदारघाटी के वन्य जीव’ समाचार शृंखला प्रकाशित की थी। इसी समाचार शृंखला और उप वन संरक्षक की रिपोर्ट के आधार पर दोआबा पर्यावरण समिति के चंद्रवीर सिंह की ओर से अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल में याचिका दाखिल की थी।
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कोर्ट ने कहा, क्यों न बंद हो उड़ान
याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। इस पर उत्तराखंड सरकार, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड, स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड, मुख्य सचिव उत्तराखंड, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग उत्तराखंड, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड, डीएम-एसपी रुद्रप्रयाग, केदारनाथ फॉरेस्ट डिवीजन गोपेश्वर को नोटिस जारी किया गया है।

उत्तराखंड सरकार से यह भी पूछा गया है कि जब बिना स्वीकृति उड़ानों से केदारघाटी का इको सिस्टम प्रभावित हो रहा है, तो चॉपर या हेलीकॉप्टर सेवा को क्यों न बंद कर दिया जाए। केदारनाथ वन्य जीव विहार के अभी तक इको सेंसिटिव जोन घोषित न हो पाने की वजह भी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पूछी गई है।
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