हर बार नए साल के सेलीब्रेशन के लिए गुलजार रहने वाली औली की वादियां इस साल पर्यटकों को मायूस कर सकती हैं।
पिछले साल इस समय औली बर्फ की सफेर चादर ओढे़ से ढकी हुई थी। इतना ही नहीं देसी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार था। लेकिन इस वर्ष औली में बर्फ नहीं है।
पर्यटक मायूस
ऐसे में बर्फ के बीच थर्टी फर्स्ट मनाने वाले पर्यटक मायूस हैं। कई पर्यटक जोशीमठ पहुंचने के बाद लौटने लगे हैं। दस वर्षों में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि थर्टी फर्स्ट के मौके पर हिम क्रीड़ा स्थली औली में अब तक बर्फ नहीं गिरी है।
थर्टी फर्स्ट पर देश के कोने-कोने से औली पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए होटल वालों ने मेहमान नवाजी के लिए कैंप फायर और पहाड़ी व्यंजनों की भी पूरी व्यवस्था की थी। मौसम के मिजाज को देखकर फिलहाल आगामी दिनों में भी बर्फ पड़ने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
27 और 28 दिसंबर को औली में तड़के कुछ बर्फबारी तो हुई, लेकिन चटख धूप खिलने के बाद बर्फ नहीं दिख रही है। अमूमन प्रतिवर्ष 20 से 25 दिसंबर के बीच औली बर्फ से ढक जाती थी। औली के साथ ही उर्गम, हेलंग, चोपता, पनार बुग्याल, मंडल में भी बर्फ नहीं जमी है।
मौसम की बेरुखी
आपदा ने इस बार का यात्रा सीजन चौपट किया तो मौसम की बेरुखी ने क्रिसमस और नए साल पर पर्यटन की संभावनाओं पर पानी फेर दिया है।
यूं तो इन सर्दियों में दो बार की बर्फबारी हो चुकी है और खुशगवार मौसम में हिमाच्छादित चोटियों का नजारा देखने लायक है, लेकिन जहां आपदा में खस्ताहाल हुई सड़कों ने पर्यटकों के कदम रोके हुए हैं वहीं अपेक्षित बर्फबारी न होने से फिलहाल हर्षिल आदि पर्यटक स्थल बर्फविहीन हैं।
कुछ साल पहले की याद करें तो नवंबर आखिर से बर्फबारी का सिलसिला शुरू होने के साथ ही हर्षिल, धराली, डोडीताल, नचिकेता ताल, हरकीदून आदि तमाम पर्यटक स्थल बर्फ से लकदक हो जाते थे।
मैदानी इलाकों में कोहरे की मार से परेशान पर्यटक पहाड़ों का रुख करते थे और क्रिसमस, नए साल पर हिमाच्छादित पर्यटक स्थल पर्यटकों से गुलजार हो जाते थे। लेकिन अब स्थितियां काफी बदल गई हैं।
इस बार अधिकांश पर्यटक स्थल बर्फविहीन
आपदा में बदहाल हुई सड़कें अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाई हैं, इसलिए पर्यटक इस ओर आने से कतरा रहे हैं। वर्ष 2011 दिसंबर में तो बर्फबारी ही नहीं हुई। दिसंबर 2012 में भी पर्यटक स्थल बर्फ से लकदक हो गए।
जनवरी में अच्छी बर्फ पड़ी, लेकिन पिछले साल भी बदहाल सड़कों ने पर्यटकों के कदम थाम लिए थे। इस बार अभी तक अपेक्षित बर्फबारी न होने से हर्षिल आदि अधिकांश पर्यटक स्थल बर्फविहीन पड़े हैं। क्रिसमस पर वीरान रहे इन पर्यटक स्थलों पर नए साल के जश्न की भी कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है।
थर्टी फर्स्ट पर देश-विदेश से पर्यटक औली पहुंचते हैं। पर्यटक यहां स्कीईंग, कैंप फायर और पहाड़ी व्यंजनों की मांग करते हैं। इस बार बर्फविहीन औली में पर्यटकों की बुकिंगें भी नहीं आने से व्यवसाय में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- महेश, पर्यटन व्यवसायी, जोशीमठ
जोशीमठ-औली रोपवे भी अब तक ठीक नहीं हुई है। औली में बर्फ भी नहीं गिरी है। होटलों में भी पर्यटकों की बुकिंगें कम मिल रही हैं। इसका सीधा असर पर्यटन व्यवसाय पर पड़ रहा है।
- माधव सेमवाल, संरक्षक, व्यापार सभा, जोशीमठ
पिछले दस वर्षों में पहली बार देखने को मिल रहा है जब दिसंबर गुजर गया, लेकिन औली बर्फ विहीन है। पिछले वर्ष नवंबर में ही औली में बर्फ पड़ गई थी। इस बार पर्यटकों की कुछ ही बुकिंगें मिली हैं। अधिकांश कमरे खाली हैं। मौसम की बेरुखी से पर्यटन व्यवसाय को धक्का लगा है।
- बीएस बिष्ट, वरिष्ठ प्रबंधक, जीएमवीएन, औली