महंगाई से त्रस्त जनता की मुसीबत और बढ़ने वाली है। सोमवार को सदन के पटल पर रखे गए कर विधेयकों के पारित होने के बाद पेट्रोल-डीजल से लेकर केबल कनेक्शन पर फिल्म देखना तक महंगा हो जाएगा। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर रिवर राफ्टिंग तक के लिए ज्यादा दाम चुकाने होंगे।
हड़बड़ी में सदन के पटल पर रखे गए कर विधेयकों को पारित कराकर सरकार करीब साल भर में 100 करोड़ रुपये का जुटाने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि नए संसाधनों की तलाश करना प्रदेश सरकार की मजबूरी है पर जो भी कर है वह बेहद मामूली हैं और इस आय को सरकार सामाजिक क्षेत्र में ही खर्च करेगी।
सोमवार को सदन के पटल पर रखे गए उपकर विधेयक में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रदेश सरकार तीन तरह की निधियों का निर्माण करेगी। पहली राज्य व्याधि निधि होगी, जिसके लिए शराब और तंबाकू उत्पादों पर दो प्रतिशत का उपकर या सेस लगाना प्रस्तावित किया गया है। दूसरी सड़क विकास निधि है।
पेट्रोल पर एक रुपये, डीजल पर 25 पैसे का सेस
मुख्यमंत्री हरीश रावत के मुताबिक इस निधि का उपयोग सड़क हादसों को कम करने के लिए होगा। इसके तहत सरकार पेट्रोल पर एक रुपये और डीजल पर 25 पैसे का सेस लगाना प्रस्तावित कर रही है। इसी तरह पर्यावरण संरक्षण निधि का निर्माण किया जाना प्रस्तावित किया गया है।
इसके तहत प्रदेश से बाहर जाने वाली लकड़ी पर 50 रुपये प्रति क्विंटल का उपकर लगाया जाएगा। इसी के तहत सरकार जंक फूड और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक रेपर फूड पर भी पांच प्रतिशत का टैक्स लगाने जा रही है।
उपकर विधेयक में रिवर राफ्टिंग को आमोद एवं पणकर विधेयक के तहत मनोरंजन के दायरे में लाया गया है। इससे रिवर राफ्टिंग के ऑपरेटर आदि 20 प्रतिशत सेस के दायरे में होंगे। इसी विधेयक के तहत केबिल आपरेटरों की ओर से केबिल पर पिक्चर दिखाने को मनोरंजन के दायरे में लाया गया है। इसके तहत ऑपरेटर को प्रति कनेक्शन 100 रुपये तक देना होगा।
आनलाइन शॉपिंग पर सरकार लगाएगी 10% कर
उत्तराखंड माल पर स्थानीय क्षेत्र में प्रवेश पर कर नया विधेयक है। इसके तहत ऑनलाइन शॉपिंग पर 10 प्रतिशत का टैक्स लगाने का प्रस्ताव किया गया है। सचिव वित्त अमित नेगी के मुताबिक यह टैक्स ऑनलाइन सामान लाने वाली कंपनियों को भरना होगा। व्यापारियों और उद्यमियों को भी राहत दी है। वाणिज्य कर संशोधन विधेयक के जरिए फार्म 16 के ऑनलाइन स्वरूप को भी मान्यता दी गई है।
ये विधेयक किए पेश
1 -उत्तराखंड राज्य विधानसभा, सदस्यों की उपलब्धियों और पेंशन, संशोधन विधेयक 2015। इस विधेयक के तहत पूर्व विधायकों के आश्रितों और परिजनों के लिए 10000 रुपये न्यूनतम पारिवारिक पेंशन का प्रस्ताव किया है।
2 -उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में 10 प्रतिशत आरक्षण विधेयक 2015
3 -भारतीय स्टांप उत्तराखंड संशोधन विधेयक 2015
4 -उत्तराखंड मूल्यवर्धित कर संशोधन विधेयक 2015
5 -उत्तराखंड माल पर स्थानीय क्षेत्र में प्रवेश पर कर विधेयक, 2015
6 -आमोद एवं पणकर प्रमोद संशोधन विधेयक 2015
7 -उत्तराखंड उपकर विधेयक, 2015
8 -विद्यालयी शिक्षा संशोधन विधेयक, 2015
9 -औद्योगिक विवाद निस्तारण विधेयक, 2015
ये हैं अनुदान मांगों की विशेषताएं
-38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए 5 करोड़ का प्रावधान।
-अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए 80 करोड़।
-सर्वशिक्षा अभियान के लिए 112.9348 करोड़ का प्रावधान।
-रमसा के तहत 28.4557 करोड़ का प्रावधान।
- कुमाऊं विश्वविद्यालय को अनुदान हेतु दो करोड़ का प्रावधान।
- पीटीए शिक्षकों के लिए मानदेय हेतु दो करोड़ का प्रावधान।
- विजिटिंग शिक्षकों के मानदेय हेतु 63 करोड़ का प्रावधान।
- ब्लाक स्तर पर मॉडल स्कूल की स्थापना के लिए 13 करोड़ का प्रावधान।
- उत्तराखंड सीमांत एवं पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि के लिए पांच करोड़ का प्रावधान।
- गौ सदनों के लिए 50 लाख रुपये का प्रावधान।
- बाढ़ नियंत्रण अनुरक्षण हेतु दो करोड़ हजार का प्रावधान।
- अनुसूचित जाति के विकास की योजना हेतु 50.6278 करोड़ का प्रावधान
समेत 57 मांगे।