पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी मार्ग पर हरड़िया के पास रामगंगा का प्रवाह रुकने से बनी झील का दायरा बढ़ता ही जा रहा है। अब झील का दायरा एक किमी तक फैल गया है।इससे 23 मकानों के साथ ही एक स्कूल भवन और कई बिजली के पोल खतरे के दायरे में आ गए हैं। झील टूटने से बड़ी तबाही की आशंका है।रामगंगा में रविवार से बनी झील में लगातार पानी बढ़ रहा है। हरड़िया नाले से मलबा लगातार नदी में गिर रहा है। भैंसखाल के बांसगून तोक में अमर राम, भावना देवी, प्रेमन सिंह, नीरज दानू, सुरेंद्र दानू, पुष्कर दानू, रमेश मेहरा, शेर सिंह, पूरन मेहरा की दो हेक्टेअर जमीन झील में समा गई है जबकि 20 नाली जमीन बह गई है।खतरे की जद में आए कई घर
सिमार (भेंसकोट) में कैलाश मेहता, नरेंद्र सिंह, कुंदन राम, कौशल्या देवी, नैन सिंह, नीरज सिंह, सुरेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह, पूरन सिंह, दिनेश दानू, मनोहर दानू धन सिंह, बलवंत सिंह के करीब 40 नाली में फैले खेत भी बह गए हैं।झील से गटघोरगाड़ी, नाचनी की नई बस्ती, भैंसखाल के बांसगून के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। 33 केवी के छह पोल, 11 केवी के तीन पोल, शीतला देवी के मंदिर, मारथोमा मिशन स्कूल का आवासीय परिसर और विद्यालय भवन भी खतरे की जद में हैं।बिजली के पोल गिरे तो मुनस्यारी तहसील की बिजली व्यवस्था ठप हो जाएगी। जहां भूकटाव हो रहा है वहां से बांसगून बस्ती 30 मीटर दूरी पर है। इससे बांसगून के 17 मकान, नई बस्ती के 6 मकान खतरे से घिर गए हैं।हरड़िया का नहीं हो रहा ट्रीटमेंट
हरड़िया में हर साल सड़क को भूस्खलन से व्यापक नुकसान पहुंच रहा है। हरड़िया में सड़क के ट्रीटमेंट के लिए रामगंगा को डायवर्ट करने का प्लान पिछले साल प्रशासन ने बनाया था लेकिन उस पर अब तक काम नहीं हुआ।इस साल बरसात शुरू होने के बाद 40 से अधिक बार सड़क बंद हो गई है। नाचनी, मुनस्यारी, मदकोट इलाके के लोगों की लाइफ लाइन मानी जाने वाली इस सड़क की दुर्दशा से लोग परेशान हैं। डीएम एचसी सेमवाल कहते हैं कि सड़क के ट्रीटमेंट के लिए भूगर्भीय सर्वे कराया जा रहा है।