राजधानी देहरादून के दून महिला अस्पताल में चार शिशुओं की मौत के मामले में डॉक्टर लापरवाही न करते तो दो महीने पहले महिला अस्पताल में चार बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। जांच कमेटी ने बच्चों की मौत के लिए डॉक्टरों की लापरवाही को जिम्मेवार माना है।
रिपोर्ट मिलने के स्वास्थ्य महानिदेशक डा. जीएस जोशी ने अस्पताल प्रबंधन के साथ ड्यूटी में तैनात तीनों डॉक्टरों का स्पष्टीकरण मांगा है। अस्पताल की सीएमएस को भी सख्त हिदायत दी गई है कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि भविष्य में लापरवाही न हो। इसके लिए इनडोर में बच्चों की देखरेख के लिए चौबीस घंटे डॉक्टर की ड्यूटी रखी जाए।
करीब दो महीने पहले जिला महिला अस्पताल में दो दिन के भीतर चार बच्चों की मौत हो गई थी। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा भी किया गया था। स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने महानिदेशक डा. जीएस जोशी को मामले की जांच कराने केआदेश दिए।
स्वास्थ्य महानिदेशक के निर्देश पर दून अस्पताल के डॉक्टरों की तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच की। कमेटी ने जांच में पाया कि अगर डॉक्टर समय पर बच्चों को सही उपचार देतीं तो उनकी जांच बचाई जा सकती थी। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. जोशी ने इसकी पुष्टि की है।
ऐसे खुला था मामला
एक नवजात की मौत पर जब परिजनों ने हंगामा किया तो अस्पताल में दो दिन केभीतर तीन और नवजातों की मौत का खुलासा हुआ। लक्ष्मी रोड निवासी ड्राइक्लीनर का काम करने वाले मुकेश ने बताया कि पत्नी गीता को महिला दून अस्पताल में भर्ती कराया था। रात ढाई बजे गीता ने बच्चे को जन्म दिया। तब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ्य था।
अगली सुबह छह बजे बच्चे की हालत खराब होने लगी और मुंह से झाग निकल रहा था। कई बार बुलाने पर भी डॉक्टर नहीं पहुंची। जिससे बच्चेक की मौत हो गई। मुकेश के हंगामा करने पर वहां भर्ती तीन अन्य महिलाओं के परिजन भी बाहर आ गए और बताया कि दो दिन के भीतर उनकेबच्चों की मौत भी मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है।