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सड़क निर्माण में नेपाल से भी फिसड्डी है भारत

Thu, 31 Jul 2014 09:43 AM IST
अमर उजाला, पिथौरागढ़
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भारत से सटे सीमा क्षेत्र में सड़क निर्माण में भारत इतना पीछे है कि नेपाल भी अब हमसे आगे निकल गया है। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला कस्बे और नेपाल के दार्चुला के बीच महाकाली बहती है।
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नेपाल ने इसी नदी के सहारे सुदूर पश्चिमांचल के दार्चुला जिला मुख्यालय और पांच अन्य जिलों को संपर्क करते हुए काठमांडू तक सड़क बना दी है। चीन की आर्थिक मदद से यह सड़क मात्र छह साल में बनकर तैयार हो गई।

एक हजार किलोमीटर लंबी इस सड़क को ‘मध्य पहाड़ी लेक मार्ग’ नाम दिया गया है। अब इस सड़क को हाटमिक्स किया जा रहा है। गोठलापानी के पास हाटमिक्स का प्लांट लग चुका है।
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गरीब देश, पर सड़कों पर ज्यादा ध्यान

नेपाल को गरीब देश माना जाता है, लेकिन उसने अपने पिछड़े इलाकों को सड़क से जोड़ने पर ज्यादा ध्यान दिया है। दार्चुला से काठमांडू तक बनी यह सड़क बैतड़ी में सतबांज चौराहे के पास बैतड़ी से आने वाली सड़क से मिल जाती है।

वहां से डडेलधुरा, कैलाली होते हुए अतरिया चौराहे के पास कंचनपुर से आने वाली सड़क में मिलती है। नेपालगंज होते हुए यह सड़क सीधे काठमांडू पहुंचती है।

इस तरह नेपाल के पश्चिमांचल के अधिकांश जिले सड़क संपर्क से जुड़ चुके हैं। इस सड़क पर फरवरी से वाहनों का संचालन शुरू हो गया था। यह सड़क दार्चुला से बैतड़ी तक महाकाली के किनारे से होकर निकल रही है।
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भारत में 14 साल में बस 16 किमी सड़क

दूसरी तरफ भारतीय क्षेत्र में जौलजीबी से टनकपुर तक प्रस्तावित सड़क के 22 किलोमीटर हिस्से के निर्माण की जिम्मेदारी लोनिवि अस्कोट डिवीजन को मिली हुई है।

अस्कोट डिवीजन पिछले 14 साल में 22 किमी में से मात्र सुनखोली तक 16 किमी सड़क बना पाया है। लोनिवि अस्कोट के ईई बीसी पंत का कहना है कि अब इसे डबल लेन करने के लिए सर्वे हो रहा है।

इसलिए सड़क निर्माण रोक दिया गया है। तालेश्वर से आगे का काम लोनिवि पिथौरागढ़ के पास है।
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