आचार्य डॉ. सुशांत राज ने कहा कि कोरोना का प्रभाव अभी भी बना हुआ है। छोटे बच्चों पर इसका अधिक प्रभाव रहता है। इसलिए कन्या पूजन पर लोग बेटियों को अन्य घरों में कन्या पूजन के लिए भेजने को लेकर खासे सजग हैं। वहीं, पूजन करने वाले भी समझदारी दिखाते हुए कन्याओं के लिए सीमित प्रसाद बनाएंगे, जबकि कई लोग प्रसाद के रूप में फल व दक्षिणा देकर पूजन करेंगे।
तिथियों की अलग अलग धारणाओं के चलते कई पर्व अब दो-दो दिन मनाए जाने लगे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार अष्टमी और नवमी की पूजा शनिवार को ही होगी। दशहरा रविवार को मनाया जाएगा।
भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के अध्यक्ष ज्योतिषी डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार शनिवार को ही कन्याएं जिमाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में मुहूर्त का विशेष महत्व है। यदि आप कोई कार्य सकाम अभिलाषा से करते हैं तो आपको मुहूर्त में ही करना चाहिए।
सूर्योदय व्यापिनी अश्विन शुक्ल अष्टमी को श्री दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी कहा जाता है। ये अष्टमी सूर्योदय के बाद एक घटी तक होनी अनिवार्य है। सप्तमी युक्ता अष्टमी है तो त्याग करना चाहिए, लेकिन यदि अष्टमी पहले दिन सप्तमी युक्ता हो और दूसरे दिन एक घटी से कम हो तो इसे सप्तमी युक्ता भी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बार विजयदशमी 25 अक्तूबर को होगी।