इधर, पंतनगर विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह के अनुसार, कमजोर ला नीना की वजह से सर्दियों में इस बार कड़ाके की ठंड रहेगी, क्योंकि यह ठंडी हवाओं के अनुकूल होता है। एल नीनो और ला नीना का मौसम के रुख को तय करने में काफी प्रभाव रहता है।
ला नीना समुद्री प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र में पानी ठंडा होने लगता है। जिसका हवाओं पर भी असर होता है और तापमान पर प्रभाव पड़ता है।
जबकि एल नीनो में इसके विपरीत होता है। यानी समुद्र का पानी गर्म होता है और इसके प्रभाव से गर्म हवाएं चलती हैं और दोनों का असर मानसून पर भी पड़ता है।