कई रोगों के लिए गुणकारी है कपूर
सगंध पौध केंद्र के शोध के अनुसार कपूर के पेड़ में तीन प्रकार के कीटोटाइप पाए गए हैं। इसमें पहला कैंफोरा टाइप पेड़, दूसरा 1.8 सिनेओल टाइप पेड़ और तीसरा कैंफोरा व सिनेओल दोनों की गुण प्रमुख मात्रा में पाए जाते हैं। यह वर्गीकरण कपूर के पेड़ में तेल गुणवत्ता के आधार पर किया गया। कपूर की पत्तियों के तेल में सिनेओल, लिनालूल, कैंफीन, टर्पीनियोल, सैफरोल मुख्य घटक हैं। जो एंटीसेप्टिक, दर्द निवारक, सूजनरोधी, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द, सांस संबंधित रोगों में लाभकारी है।
बाजार में कपूर तेल की कीमत एक हजार रुपये प्रति लीटर
कपूर की पत्तियों को आसवन के बाद 2 से 3 प्रतिशत तक सगंध तेल प्राप्त होता है। बाजार में एक लीटर तेल की कीमत 800 से 1000 रुपये है। यदि किसान कपूर की खेती करते हैं तो सालाना 2.50 से तीन लाख रुपये तक आय प्राप्त कर सकते हैं।
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उत्तराखंड में कपूर की खेती के लिए संस्थान पिछले 10 साल से शोध कर रहा है। अब शोध में अच्छे परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश में कपूर की खेती जा सकती है। जो हिमालयी क्षेत्रों के किसानों के लिए एक विकल्प होगा। कपूर के पेड़ की बायोमास उत्पादन क्षमता उच्च होती है, जो इसे जैव ऊर्जा और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड में किसानों के लिए कपूर खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। -नृपेंद्र सिंह चौहान, निदेशक सगंध पौध केंद्र