हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा नदी में हो रहे अवैध खनन के मामले में केंद्र सरकार को जवाब-दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूछा है कि क्या आपदा के नाम पर गंगा में खनन किया जा सकता है?
साथ ही कोर्ट ने प्रदेश सरकार को अवैध खनन को रोकने के लिए किए गए उपायों पर शपथपत्र दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में हुई सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी जयप्रकाश बडोनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की विशेष टीम ने हरिद्वार में गंगा में खनन न करने की संस्तुति दी थी। लेकिन फिर भी वहां पर आपदा के नाम पर खनन कार्य किया जा रहा है।
कोसी में खनन पर भी याचिका
उधर, बाजपुर निवासी मोदाराम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कोसी नदी पर हो रहे अवैध खनन से नदी का रूख परिवर्तित हो रहा है। जिससे कई गांवों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा हो रहा है। सरकार इस पर रोक नहीं लगा रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।