चुनाव लड़ने के बाद व्यय ब्योरा उपलब्ध कराने में की गई लापरवाही पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों को भारी पड़ने जा रही है।
चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं देने वाले 2951 लोगों का राजनीतिक सफर छह साल के लिए बैन हो सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस दायरे में आने वाले 2951 लोगों को नोटिस थमा दिया है।
पद से हाथ धोना पड़ेगा
बीस सितंबर तक चुनावी ब्योरा उपलब्ध नहीं कराने पर ऐसे लोगों को डिफाल्टर घोषित कर दिया जाएगा। साथ ही उन लोगों को अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा, जिन्होंने जीतने के बाद भी ब्योरा नहीं दिया है।
किसी भी चुनाव की मतगणना होने के बाद एक महीने के अंदर प्रत्याशियों को चुनाव में खर्च किए गए व्यय का ब्योरा निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराना होता है।
राज्य के 12 जिलों के साथ ही ऊधमसिंह नगर जिले में भी बीती 18, 21, 24 जून को पंचायत चुनाव और 27 जून को मतगणना कराई गई थी।
पंचस्थानीय कार्यालय के मुताबिक जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव लड़े 355 प्रत्याशियों में से महज 84 ने ब्योरा दिया है और 271का ब्योरा नहीं आया है। बीडीसी के 1481 प्रत्याशियों के सापेक्ष 220 का चुनाव ब्योरा मिला है और 1261 ने ब्योरा देने की जहमत नहीं उठाई। इसी तरह ग्राम प्रधान पद के 1801 प्रत्याशियों में से 382 का ब्योरा कार्यालय को मिल चुका है, जबकि 1419 ने ब्योरा देने का नाम ही नहीं लिया है।
बीस सितंबर तक हरहाल में व्यय ब्योरा कारण सहित जमा कराना है। यदि इसके बाद भी ब्योरा नहीं दिया जाता तो हारे प्रत्याशी तो छह साल तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, साथ ही जीते हुए जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी सदस्य, ग्राम प्रधानों को अपना पद छोड़ना पड़ेगा। इस संबंध में आयोग की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया है।
-आरसी त्रिपाठी, प्रभारी अधिकारी पंचस्थानीय/डीपीआरओ ऊधमसिंहनगर।