उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार आयोजित हो रही मां नंदा देवी राजजात यात्रा सोमवार सुबह 11:35 बजे शुरू हो गई।
नंदा राजजात के शुभारंभ के अवसर पर राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी पहुंचे। इस दौरान वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश, अनुसूया प्रसाद मैखुरी और बदरीनाथ के विधायक मौजूद रहे।
नौटी में सोमवार को सुबह 8 बजे से मां नंदा की पूजा-अर्चना शुरू हुई। जहां चौसिंगा खाडू और मां नंदा की मूर्ति की पूजा की गई। मां की भक्ति में लीन भक्तों ने देवनृत्य भी किया।
14 साल बाद मां नंदा को मायके से विदा करके उनके ससुराल शिवधाम पहुंचाने की इस यात्रा में लोगों के दिलों में आस्था और उल्लास हिलोरें ले रहा है।
यात्रा पहले भी दो बार स्थगित हो चुकी है। ऐसे में इस बार यात्रा आयोजक किसी भी हाल में यात्रा को स्थगित होने देना नहीं चाहते।
20 पड़ावों से होकर 280 किमी गुजरेगी यात्रा
नंदाधाम नौटी से सोमवार को सुबह 11:40 बजे विधि विधान और धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रीनंदा राजजात (यात्रा) प्रस्थान करेगी। 20 दिवसीय हिमालयी महाकुंभ में शामिल होने के लिए सैकड़ों लोग रविवार की देर शाम तक नौटी पहुंच चुके थे।
280 किमी लंबी यह यात्रा एशिया की सबसे लंबी पैदल यात्रा है, जो 20 पड़ावों से होकर गुजरेगी।
नौटी की इष्ट देवी उफराईं है, पर गांव के बीचोंबीच स्थित नंदा के मंदिर में खासी चहल-पहल है। वर्ष 2000 में जात आधिकारिक रूप से कांसुवा से शुरू हुई थी। 1987 में भी यात्रा कांसुवा से शुरू हुई थी।
कांसुवा की जगह इस बार नौटी से शुरू
इस बार यात्रा नौटी से शुरू करने की कोई खास वजह नहीं बताई गई है। यात्रा की रस्में पारंपरिक ही हैं, उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। कांसुवा से चौसिंग्या खाडू नौटी लाया गया है।
सोमवार को यह खाडू ईड़ा बधाणी के लिए रवाना होगा। मान्यता है कि मां नंदा जब अपने ससुराल के लिए निकलीं तो इस गांव के लोगों ने मां का खूब स्वागत किया था तब से नंदा की जात ईड़ा बधाणी जरूर जाती है।
पर दूर से सीधी और सरल दिखने वाली जात स्थानीय स्तर पर उतनी ही उलझी हु़ई है। परंपरा के बीच में नई परंपराएं भी गढ़ी जा रही हैं। नौटी से यात्रा का श्रीगणेश इसी का सबब है।
नौटी में यात्रा के लिए उमड़ी भीड़
कांसुवा से खाडू रविवार को ही नौटी लाया गया। स्थानीय स्तर पर भादौं (भाद्र पक्ष) का पहला दिन और संग्रांद (संक्रांति) है। इसे शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
ऐसे में यात्रा रविवार से ही शुरू हो जानी चाहिए थी। दो गते भादौं से यात्रा शुरू होने को गांव के ही कुछ लोग ‘अच्छा’ नहीं मान रहे हैं, पर यात्रा अपने धार्मिक अनुष्ठान के साथ जारी है।
मां नंदा को विदा करने की इस जात का गांव से गहरा नाता है। ऐसा दिख भी रहा है। 175 परिवार वाले नौटी गांव में करीब सौ परिवार ही गांव में रहते हैं, पर जात के लिए बाकी के परिवार वापस गांव पहुंच रहे हैं।
नौटी में चहल-पहल खासी बढ़ गई है। गाड़ियों का तांता लग चुका है। रविवार की शाम नौटी में सड़क पर जाम की स्थिति है।