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हर रास्ते पर मुश्किलों के पहरे

Thu, 08 Aug 2013 11:53 AM IST
रमेश चंद्र जोशी
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मां नंदा की ससुराल के हर रास्ते पर आपदा ने मुश्किलों के पहरे लगा रखें हैं। कुलसारी से लेकर चेपडियूं तक भी सड़क और पैदल रास्ता पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है। तैयारियों के नाम पर इन दिनों पेयजल लाइन का निर्माण हो रहा है, जबकि तीन कार्य शुरू ही नहीं हुए। यहां राजजात को परंपरा के निर्वहन तक सीमित रखने की बात भक्त कह रहे हैं।
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चेपडियूं बुटोला थोकदारों का गांव है, लेकिन इस बार यहां तक पहुंचने की राह आपदा से प्रभावित हो चुकी है। कर्णप्रयाग-ग्वादलम मार्ग जहां कुलसारी से थराली तक बदहाल है, वहीं थराली से राड़ीबगड़ तक थराली-देवाल मार्ग का 11 सौ मीटर हिस्सा ध्वस्त हो रखा है। यही नहीं जिस पैदल रास्ते से मां नंदा को कुलसारी से चेपडयूं गांव पहुंचना है, वह भी आपदा के कहर से क्षतिग्रस्त है।

हर घर में होती नंदा की पूजा
बुटोला थोकदारों का गांव चेपडियूं में मां नंदा का कोई विशेष मंदिर नहीं है, लेकिन यहां हर घर में मां नंदा आराध्य देवी के रूप में पूजी जाती है। राजजात में भी यहां थोकदारों के घर पर ही पूजा-अर्चना होती है।
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कहां ठहरेंगे देवी भक्त
चेपडियूं में करीब 22 लाख की लागत से 22 बेड की डारमेट्री, 5 लाख की लागत से मिलन केंद्र सहित टीन शेड का निर्माण होना था, लेकिन आज तक एक भी काम शुरू नहीं हुआ। भले ही पेयजल योजना का काम इन दिनों चल रहा है।

चेपडियूं क्षेत्र आपदा से व्यापक रूप से प्रभावित हुआ है। कुछ परिवार टेंट में रह रहे हैं। अधिकारियों के दौरों के बाद भी तैयारियों के नाम पर एक भी काम नहीं हुआ। आराध्य मां नंदा भी अपने भक्तों की विपदा से अंजान नहीं है। इन हालातों में राजजात कैसे भव्य होगी, यह समिति को भी समझना चाहिए। इस बार हम लोग पौराणिक परंपरा का निर्वहन कर मां नंदा की पूजा करेंगे।
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- पृथ्वी सिंह बुटोला, थोकदार व पड़ाव अध्यक्ष चेपडियूं

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