उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय एक लाख से अधिक है लेकिन बात जब जिलों की होती है तो काफी असमानता देखने को मिलती हैं।
प्रदेश में ऐसे कई जिले हैं, जो जीवन स्तर और संतुष्टि स्तर पर बेहद पिछड़े हुए हैं। प्रदेश में जिला स्तर पर पहली बार तैयार किए गए मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में यह बात सामने आई है।
प्वाइंट पर आधारित इस सूचकांक में आदर्श स्थिति 1 मानी जाती है। एक से कम अंक खराब स्थिति को दर्शाता है। ऐसे में प्रदेश में जहां बेहतर स्थिति में नैनीताल नंबर एक पर है वहीं टिहरी की हालत सबसे ज्यादा खराब है। प्रदेश में आठ जिले ऐसे हैं जहां एचडीआई राज्य के औसत से कम है।
सेवा के अधिकार आयोग के सचिव और विशेषज्ञ पंकज नैथानी की ओर से तैयार किए गए इस सूचकांक का प्रकाशन जर्नल ऑफ इनकम एंड वेल्थ में हो चुका है। पंकज नैथानी के मुताबिक इस सूचकांक को अभी आरंभिक स्तर पर तैयार किया जा सका है। सूचकांक के मुताबिक नैनीताल जिले की स्थिति सबसे बेहतर है।
शिक्षा की गुणवत्ता, प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य (शिशु मृत्यु दर) आदि के आधार पर तैयार किए गए इस सूचकांक में टिहरी सबसे निचले पायदान पर है। प्रति व्यक्ति आय और जिला स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से आगे रहने वाला हरिद्वार जिला भी इस सूचकांक में 12वें नंबर पर है।
हरिद्वार में शिशु मृत्यु दर (72) प्रदेश में सबसे अधिक है और जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्पेटेंसी) सबसे कम (65) है। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से हरिद्वार का नंबर तीसरा है। शिक्षा के मानक में नैनीताल का नंबर पहला है और प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से चौथा।
जीवन प्रत्याशा में नैनीताल का नंबर पांचवां है। दूसरी ओर टिहरी का हाल हर मोरचे पर बुरा है। जीवन प्रत्याशा में टिहरी का नंबर 12वां है। हरिद्वार के बाद शिशु मृत्यु दर में टिहरी का नंबर है। शिक्षा के मानकों में टिहरी का नंबर 11वां है। जबकि प्रति व्यक्ति आय में टिहरी का नंबर नौ वां है।