उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी रेंज में भूमि खरीदने और वहां पेड़ों के कटान के विवाद के मामले में वन अधिकारियों के खिलाफ डीजीपी बीएस सिद्धू की ओर से लिखाई गई एफआईआर एवं चार्जशीट पर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए यह पूछा है कि क्यों न मामले की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से कराई जाए। इसकी जांच का जिम्मा डीआईजी स्तर के अधिकारी को दिया जाए।
2013 का है मामला
न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। श्री प्रसाद सकलानी व अन्य एवं धीरज पांडे व अन्य ने हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर कर कहा था कि 2013 में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बीएस सिद्धू ने वन विभाग पर आरोप लगाया था कि उनके मसूरी स्थित प्लाट में डीएफओ धीरज पांडे व अन्य ने पेड़ काट दिए हैं।
उक्त अधिकारी ने वनाधिकारियों के खिलाफ इस पर एफआईआर भी दर्ज कराई थी जिसके बाद हाईकोर्ट की ओर से डीएफओ व अन्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी लेकिन पुलिस जांच के बाद में उन वनाधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
सरकार से एसआईटी जांच पर मांगा जवाब
चार्जशीट के खिलाफ मसूरी डीएफओ व अन्य ने हाईकोर्ट में शरण ली। याचिकाकर्ताओं की ओर से इस प्रकरण की जांच स्पेशल जांच टीम से कराने की प्रार्थना की थी।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने चार्जशीट की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए जांच डीआईजी स्तर के अधिकारी से कराने को कहा है। साथ ही सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए एसआईटी जांच पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।