देहरादून-पांवटा हाईवे पर एक गड्ढा मां-बेटे के लिए काल बन गया। गड्ढे से अनियंत्रित हुई तेज रफ्तार यूटिलिटी ने सड़क किनारे खडे़ मां बेटे को रौंद दिया जिससे दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई।
अनियंत्रित यूटिलिटी भी सड़क किनारे पलट गई। चालक अब्दुल रज्जाक निवासी त्यूनी भी घायल हो गया। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर में भर्ती कराया गया है। घटना देहरादून के सहसपुर थाना क्षेत्र की है।
जानकारी के अनुसार सूरजपाल (24) पुत्र स्वर्गीय लक्ष्मीचंद, निवासी सभावाला अपनी मां मग्गो देवी (55) के साथ बैरागीवाला गांव में अपने मामा धनीराम और दीपचंद के यहां आया हुआ था।
मंगलवार की सुबह साइकिल पर मां के साथ घर जा रहा था। लक्खनवाला चौक के समीप मां की साड़ी साइकिल के टायर में उलझ गई जिस पर सूरजपाल ने हाईवे किनारे साइकिल रोक ली।
एक साथ जलीं तीन चिताएं
दोनों सड़क किनारे खडे़ थे, इसी दौरान सहसपुर की ओर से आ रही यूटिलिटी (यूके-16 सीए-0035) ने दोनों को साइकिल समेत रौंद दिया जिससे दोनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। कुछ दूर आगे जाकर अनियंत्रित यूटिलिटी भी सड़क किनारे पलट गई।
पुलिस ने दोनों के शवों को लेहमन अस्पताल पहुंचाया। जहां पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।
उधर, विधायक सहदेव पुंडीर ने अस्पताल पहुंच कर मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया। थानाध्यक्ष यशपाल बिष्ट ने बताया यूटिलिटी को कब्जे में ले लिया गया है। गड्ढा दुर्घटना की एक बड़ी वजह रही।
नम आंखों से दी विदाई
सभावाला गांव के आसन नदी स्थित घाट में मंगलवार की शाम को एक साथ तीन चिताएं जलीं। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। नम आंखों से मृतकों को अंतिम विदाई दी गई। मां बेटे के साथ ही सोमवार की शाम को शिमला बाईपास पर हुई दुर्घटना में मारे गए गांव के ही मोहित (18) पुत्र अमीचंद का भी अंतिम संस्कार किया गया।
मामा को सगाई का न्योता देने गया था सूरज
दुर्घटना में मारे गए सूरजपाल की दो जनवरी को सगाई थी। उसका रिश्ता गणेशपुर बिहारीगढ़ यूपी से हुआ था। वह मां के साथ सगाई के लिए बैरागीवाली निवासी अपने मामा धनीराम और दीपचंद को न्योता देने गया था। लौटते वक्त यूटिलिटी मां बेटे के लिए काल बनकर आई।
पिता की हो चुकी है मौत
सूरजपाल के पिता लक्ष्मीचंद की मृत्यु तीन वर्ष पहले हो चुकी थी। वह परिवार चलाने के लिए सेलाकुई स्थित एक कंपनी में काम करता था। घर चलाने के लिए उसकी छोटी बहन रीतू भी उसके साथ काम पर जाती थी। दो छोटे भाई संदीप और सुनील अभी पढ़ रहे हैं। संदीप 12वीं और सुनील 10वीं का छात्र है।
मौत की खबर के बाद से ही बहन रितू का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि सबसे छोटा भाई सुनील सदमे है। भाई बहनों के ऊपर से पिता के बाद अब मां का साया भी उठ गया है। जिस घर में कल तक बडे़ बेटे की सगाई की तैयारियां चल रही थीं, वहीं आज मातम पसरा हुआ है। मां बेटे की मौत से गांव वाले भी सकते में हैं।