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कालाधनः बाबा रामदेव के रूट पर चली मोदी सरकार

Tue, 04 Nov 2014 11:32 PM IST
कौशल सिखौला/अमर उजाला, हरिद्वार
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बाबा रामदेव की ओर से वर्ष 2007 से उठाए जा रहे 11 आर्थिक मुद्दों को केंद्र सरकार ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सभी मुद्दों पर काम शुरू किया जा रहा है।
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बाबा रामदेव के मुद्दों में कालाधन वापस लाना सबसे अहम था। इसके अलावा बड़े नोट वापस लेने, लचर कानून समाप्त करने, पब्लिक सर्विस डिलीवरी गारंटी एक्ट बनाना, आर्थिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश, भूमि अधिग्रहण नीति को किसान हितकारी बनाना, पेटेंट सुरक्षा, स्टेट फडिंग चुनाव पद्धति, आदर्श ग्राम निर्माण योजना, भारतीय भाषाओं में शिक्षा व्यवस्था, सिंगल कर प्रणाली और कालेधन को राष्ट्रीय संपत्ति बनाना शामिल हैं।

मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही बाबा ने ये मुद्दे उन्हें सौंप दिए थे। प्रधानमंत्री ने इन पर काम करवाना शुरू कर दिया है। फिलहाल कालाधन वापसी का मुद्दा सबसे पहले लिया गया है।
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2007 में बाबा ने बताया था कालेधन का रूट

बाबा रामदेव ने वर्ष 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को फारेन इन्वेस्टमेंट और एक्सटर्नल डेट की जानकारी देते हुए वह रूट बताया था जिसके जरिए स्विस, मॉरिशस, इटली, दुबई, सिंगापुर, लग्जमबर्ग, जर्मनी, स्पेन, नार्वे, आयरलैंड, हालैंड, फ्रांस, अमेरिका आदि 70 देशों में कालाधन भेजा जाता है।

बाद में वर्ष 2009 और 2011 में पुन: जानकारी के दस्तावेज तत्कालीन प्रधानमंत्री को बाबा द्वारा सौंपे गए। वह सरकार तो चुप रही लेकिन वर्तमान सरकार ने आते ही बाबा के उसी रूट पर काम शुरू कर दिया है। इस रूट में धन कैसे जाता है और कैसे आता है की व्यापक जानकारी दी है।

विदेशों में 500 लाख करोड़ का कालाधन
बाबा रामदेव ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 500 लाख करोड़ के कालेधन की जानकारी दी थी। अब केंद्र ने मान लिया है कि धन इससे अधिक है। स्वदेश में भी 100 लाख करोड़ से अधिक का कालाधन जमा है।

इस सरकार को विदेशों से धन लाने के साथ-साथ देश में पड़े कालेधन को भी बाहर निकालना होगा। उन्हें विश्वास है कि मोदी कालाधन वापस लाकर देश की आर्थिक दशा जरूर बदलेंगे। इसके बावजूद यदि उन्हें कहीं ढिलाई दिखाई देती है तो वह पहले की तरह जागरण यात्राएं निकालने से नहीं हिचकेंगे।
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