उत्तराखंड सहित अन्य हिमालयी राज्यों की सालों पुरानी मांग आखिरकार केंद्र ने पूरी की है। नीति आयोग ने हिमालयी राज्यों के लिए अलग से प्रकोष्ठ स्थापित किया है।
यह प्रकोष्ठ हिमालयी राज्यों के लिए फैसला लेने में फास्ट ट्रेक का काम करेगा। इसके साथ ही हिमालयी राज्यों की अपनी विश्ष्टि समस्याओं के समाधान का मंच भी यह प्रकोष्ठ बन सकेगा। जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से यह स्वीकार किया जा रहा है कि पर्वतीय राज्यों की अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति है।
इस विशेषता के कारण इन राज्यों को मैदानी राज्यों के साथ एक ही तराजु में नहीं तोला जा सकता है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र से अलग से पर्वतीय विकास मंत्रालय के गठन की मांग भी की जाती रही है।
इसी के तहत केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भी अलग से पर्वतीय राज्यों के लिए मंत्रालय के अधीन एक इकाई गठित कर रहा है। अब असली तोहफा इन राज्यों को नीति आयोग में अलग से प्रकोष्ठ की स्थापना से मिला है।
प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और इंटिग्रेटिड माउंटेन इनीसिएटिव (आईएमआई) के अध्यक्ष डॉ. आरएस टोलिया के मुताबिक 30 नवंबर को दिल्ली में हुई नीति आयोग की बैठक में यह फैसला किया जा चुका है। इस प्रकोष्ठ के स्थापित होने से पर्वतीय राज्यों को सीधा फायदा मिलेगा। हाल ही में केंद्र ने साफ कर दिया था कि उत्तराखंड का विशेष राज्य का दर्जा बरकरार रहेगा।
विश्व पर्वतीय दिवस 11 दिसंबर को पिछले सालों की तरह इस बार भी विश्व पर्वतीय दिवस पर 11 दिसंबर को दिल्ली में आईएमआई एक विशेष सेमीनार का आयोजन कर रहा है। आईएमआई के अध्यक्ष डा. आरएस टोलिया के मुताबिक इस बैठक में आपदा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।