आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहला माडल हाउस ‘आश्रय’ तैयार हो गया है। अमर उजाला फाउंडेशन की मेहपत रंग लाई।
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महज एक लाख रुपए की लागत वाले लकड़ी, मिट्टी और पत्थर के इस माडल हाउस के निर्माण में पहाड़ी शैली का अनुसरण किया गया है। इसमें जीवनरक्षक किट के साथ ही टेरी संस्था का सोलर पैनल और फ्लेम वाला लकड़ी का स्टोव भी रखा गया है।
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आपदा से सर्वाधिक प्रभावित कुल पांच स्थानों पर इस तरह के माडल हाउस बनाए जाएंगे। इनके निर्माण में स्थानीय जरूरतों के मुताबिक राजमिस्त्रियों के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा। हेस्को के संस्थापक डा. अनिल जोशी के अनुसार हेस्को में राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस संबंध में सुझाव सामने आए हैं।
भवनों से काफी लाभ पहुंचेगा
पहाड़ों पर कम समय और कम अवधि में बनने वाले इन भवनों से काफी लाभ पहुंचेगा। कार्यक्रम में हिमालय पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान (उत्तरकाशी), अलकनंदा घाटी शिल्पी फेडरेशन, पीपलकोटी (चमोली), हरियाली संरक्षण प्रशिक्षण एवं जन विकास समिति, कुलसारी (चमोली) ग्रामीण सुधार एवं श्रमिक सेवा संघ बुठना (रुद्रप्रयाग) और स्वराज बहुउद्देशीय सहकारी समिति खुमेरा (रुद्रप्रयाग) के सदस्य मौजूद रहे।
बोले प्रशिक्षणार्थी
प्रशिक्षण से रोजगार में मदद मिलेगी। आपदा प्रभावित लोगों की भी सहायता होगी।
- राजपाल सिंह बर्त्वाल
प्रशिक्षण के दौरान नई-नई तकनीकें सीखने को मिलीं। हमें तकनीकी रूप से मदद पहुंचेगी।
- सुजान सिंह रावत
कम अवधि में अधिक जानकारी हासिल करने में यह प्रशिक्षण बेहद मददगार है।
- जितेंद्र सिंह नेगी
पहाड़ी क्षेत्र के लिहाज से सुरक्षित भवन निर्माण तकनीक की जानकारी मिली।
- जसपाल
आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुरक्षित मकान बनाने की जानकारी ली।
- बांके लाल
भूकंप से बचाने में मददगार मकान के निर्माण की जानकारी हासिल की।
- सुशील कुमार भट्ट
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जान-माल बचाने में कारगर मकान का निर्माण सीखा।
- हरीश जोशी
पहाड़ी क्षेत्रों, आपदा प्रभावित स्थानों पर भवन निर्माण की सीख मिली।
- सुरेंद्र राम