मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन से कोई खतरा नहीं है। यह कहना है ग्रेस कैंसर फाउंडेशन के सदस्य एवं इंडियन रेडियोलॉजिकल एवं इमेजिंग एसोसिएशन के सदस्य डॉ. एन ईश्वर चंद्र, टेलीकॉम कमीशन के पूर्व सदस्य एवं सचिव एसएस सिरोही और ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन का। उन्होंने बताया कि अभी तक यह बात साबित नहीं हुई कि मोबाइल टावर के रेडिएशन से कैंसर होता है।
सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में ग्रेस कैंसर फाउंडेशन के डॉ. एन ईश्वर चंद्र ने बताया कि अब तक ऐसे कोई वैज्ञानिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं जो मोबाइल टावर उत्सर्जन के कारण कैंसर के जोखिम को बताते हों। टेलीकॉम कम्यूनिकेशन के पूर्व सदस्य एसएस सिरोही ने बताया कि ईएमएफ उत्सर्जन के अनुमानित स्तर की बात करें तो भारत में सख्त नियमों का पालन होता है। जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से लागू इंटरनेशनल कमीशन ऑन नोन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन की ओर से निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय मानकों से दस गुना सख्त हैं और दुनिया के 90 प्रतिशत देश इसका पालन नहीं करते हैं।
ब्रॉडबैंक इंडिया फोरम के अध्यक्ष टीवी रामचंद्रन ने मोबाइल टावर से निकलने वाले उत्सर्जन की आशंका को दूर करतने की मांग करते हुए कहा कि मोबाइल टावर और फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रिक्वेंसी रेडिएशन बेहद मामूली स्तर के हैं। मोबाइल टावर से निकलने वाले विकिरण, मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाले विकिरणों की तुलना में हजारों गुना कमजोर हैं। यह तथ्य अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि इन टावरों से निकलने वाले सिग्नल बिल्कुल हानिकर नहीं हैं।