उन्होंने बताया कि पिछली चार जनगणनाओं के अनुसार पौड़ी की जनसंख्या में लगातार गिरावट आ रही है। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान ग्रामीण जनसंख्या में कमी तो आई लेकिन नगरीय जनसंख्या में बढ़ोत्तरी भी हुई है।
कुल 1212 ग्राम पंचायतों में से 1025 में पलायन हुआ है। इसमें से करीब 52 फीसदी पलायन केवल आजीविका के लिए हुआ है। 26 से 35 वर्ष आयु के करीब 34 लोगों ने राज्य से बाहर पलायन किया है।
25 फीसदी गांव और तोक मानव विहीन
वर्ष 2011 के बाद जिले में करीब 25 फीसदी यानी 186 गांव और तोक पूरी तरह मानव विहीन हुए हैं। वहीं, 112 तोक, गांव या मजरों की जनसंख्या में 50 फीसदी से अधिक की कमी आई है।
-गांव की अर्थव्यवस्था व विकास को वृद्धि देना।
-कृषि एवं गैर-कृषि आय में बढ़ावा देने की जरूरत।
-ग्राम केंद्रित योजनाएं बनाई जाने की आवश्यकता।
-मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता अनिवार्य।
-कौशल विकास की योजनाएं चलाना।
-सरकारी अधिकारियों व कर्मियों को गांवों से जोड़ें।
-महिलाओं की भूमिका व बेहतरी पर फोकस।
-ग्रोथ सेंटरों की स्थापना की जाए।
-ग्रामीण अर्थव्यवस्था के ळिए बनें योजनाएं।
-पशुपालन, कृषि व उद्यानिकी विकास को बनें योजनाएं।
-सूक्ष्म और लघु उद्योग व मार्केटिंग की बने योजनाएं।
-नए पर्यटन क्षेत्रों का विकास और पुरानों का प्रचार-प्रसार।