लोक सभा चुनाव में हार के कारणों पर मंथन करने के लिए दिल्ली ‘वार रूम’ में एंटोनी कमेटी के समक्ष उत्तराखंड से कांग्रेस के पांच में से तीन प्रत्याशी ही पहुंचे।
प्रदीप टम्टा और रेणुका रावत धारचूला में उपचुनाव में व्यस्त रहने के कारण नहीं पहुंच पाए।
सूत्रों की माने तो एके एंटोनी की अध्यक्षता में बनी कमेटी के सामने उत्तराखंड के नेताओं ने ठीक चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन, महाराज फैक्टर, भीतरघात आदि कारणों को गिनाया।
कुछ कांग्रेसियों ने केंद्र की ओर से उत्तराखंड की समस्याओं की अनदेखी की बात भी उठाई गई। यह भी कहा गया कि भाजपा का प्रभाव कम होता दिख रहा है।
नेतृत्व परिवर्तन होने से भी पार्टी को हुआ नुकसान
कांग्रेस अपनी कमियों को दूर कर फिर से वापसी कर सकती है।
रविवार को उत्तराखंड से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश, कैबिनेट मंत्री और लोक सभा चुनाव में पौड़ी प्रत्याशी हरक सिंह रावत, टिहरी प्रत्याशी साकेत बहुगुणा, नैनीताल प्रत्याशी केसी सिंह बाबा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय आदि एंटोनी कमेटी के सामने पहुंचे।
इन नेताओं से एंटोनी कमेटी ने अलग-अलग बात की। चार सदस्यीय कमेटी में एके एंटोनी के अलावा मुकुल वासनिक, आरसी खूंटिया और महाराष्ट्र से एक अन्य सदस्य शामिल थे।
हालांकि कमेटी से बातचीत का खुलासा करने को कोई नेता तैयार नहीं है पर सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की आपसी खींचतान और समन्वय का मामला करीब-करीब सभी नेताओं ने उठाया।
कहा गया कि ठीक चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन करने का भी पार्टी ने नुकसान उठाया। इसका एक नुकसान नेतृत्व परिवर्तन के कारण आपसी खींचतान को बढ़ावा देने वाला भी साबित हुआ।
सतपाल महाराज बने हार की बड़ी वजह
यह भी कहा गया कि गढ़वाल के पूर्व सांसद सतपाल महाराज के पार्टी के छोड़ने से ऐसा माहौल बना जैसे कांग्रेस हार रही है।
बताते हैं हरक सिंह ने चुनाव में प्रचार के लिए कम समय मिलने की बात भी की। बताया यह जा रहा है कि टिहरी प्रत्याशी साकेत बहुगुणा ने टिकट में देरी को भी हार का एक कारण बताया।
नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र की कांग्रेस सरकार की ओर से उत्तराखंड से संबंधित मामलों को तवज्जो न देने का भी चुनाव पर फर्क पड़ा।
दूसरी ओर प्रदीप टम्टा और रेणुका रावत दिल्ली पहुंचे ही नहीं। प्रदीप टम्टा के मुताबिक मुन्स्यारी में चुनाव में व्यस्त रहने के कारण वे दिल्ली पहुंच नही पाए। इसी तरह रेणुका रावत भी धारचूला में व्यस्त रही।
लोक सभा में हार के कारण कमेटी के सामने रख दिए गए हैं। मेरा मानना है कि हार के कारणों पर मंथन कर लिया जाए और कमियों को दूर किया जाए तो आगे आने वाले समय में कांग्रेस को जीतने से कोई नहीं रोक सकता।
- इंदिरा हृदयेश, वित्त मंत्री
हार के कारण क्या गिनाए जा सकते हैं। मैने कमेटी से कहा है कि मुझे कुछ समय बाद सुन लिया जाए। मैने अभी-अभी संगठन का दायित्व संभाला है।
- किशोर उपाध्याय, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
डैमेज कंट्रोल में सफल रही कांग्रेस
उधर डोईवाला विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस को झटका देने वाली जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित को मैनेज करने में पार्टी मैनेजमेंट सफल रहा।
स्वास्थ्य मंत्री खुद उनके घर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने दिल्ली से फोन पर उनसे बात की। इसके बाद हेमा पुरोहित और जिला पंचायत सदस्य पद पर उम्मीदवार रहीं पूनम पुरोहित ने पार्टी से इस्तीफा वापस ले लिया।
उनके इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। सूत्रों के अनुसार हेमा को पार्टी में उचित सम्मान का आश्वासन दिया गया है।
पार्टी को जोड़ने में जुटे हरीश रावत
चकतुनवाला से नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित ने शनिवार को कुछ लोगों पर भीतरघात का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
हेमा का कहना था कि पार्टी के कुछ लोगों ने जिला पंचायत चुनाव में उन्हें हराने का प्रयास किया। इन लोगों ने खुलकर भाजपा प्रत्याशी के लिए काम किया।
उनके साथ माजरी माफी से उम्मीदवार रहीं पूनम पुरोहित ने भी पार्टी प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप दिया था। चकतुनवाला डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में होने के कारण इसे पार्टी के बड़ा झटका माना जा रहा था।
यही वजह रही कि रविवार दोपहर स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी हेमा के घर पहुंच गए। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उन्हें फोन कर इस्तीफा वापस लेने के लिए कहा।
सूत्रों के अनुसार सीएम ने कहा कि यदि वे पार्टी छोड़ती हैं तो उनके विरोधियों का मकसद पूरा हो जाएगा। वे पार्टी छोड़ने के बजाए अपना जनाधार बढ़ाएं और भीतरघात करने वालों को जवाब दें।