सरकारी अस्पतालों में जारी दवा संकट से निपटने में नाकाम रही सरकार ने नया फार्मूला निकाला है। अस्पतालों में खत्म हो चुकी दवाओं के विकल्प के तौर पर दूसरी दवाएं दी जा रही हैं। हालांकि खत्म दवाओं की सप्लाई को लेकर विभागीय मंत्री, उच्चाधिकारियों से लेकर अस्पताल कर्मियों तक ने अब मौन साध लिया है।
प्रदेश में दवा संकट की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से लेकर विभागीय अधिकारी तक दवा संकट ना होने की बात करते रहे। जबकि बाद में खुद अधिकारियों की जांच में ही इसकी पुष्टि हुई।
दे रहे वैकल्पिक दवाएं
स्वास्थ्य महानिदेशक ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि जिला स्तर पर दवाओं की खरीद नहीं हुई है। उसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री लगातार पर्याप्त मात्रा में दवा होने का दावा करते रहे। मामला उछलने के बाद अब विभागीय मंत्री से लेकर अधिकारियों तक ने चुप्पी साध ली है।
अस्पतालों में खत्म हो चुकी दवाओं के विकल्प के तौर पर अन्य दवाएं दी जा रही हैं। जो दवाएं खत्म हो चुकी हैं, उनकी जानकारी नहीं दी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल कर्मियों को स्पष्ट तौर पर दवा और अन्य सुविधाओं की कमी की जानकारी बाहरी व्यक्ति को ना देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके चलते अस्पतालों के कर्मचारी भी मुंह खोलने से बच रहे हैं।