आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं लचर पड़ती जा रही हैं। सड़क मार्ग से कटे गांवों में चिकित्सा सेवा ठप है। ऐसे में मरीजों को कंधे पर लाद कर अस्पताल तक पहुंचाना तीमारदारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली में स्वास्थ्य सेवाएं केवल सड़क मार्ग वाले क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई हैं। जो हिस्से सड़कों से कटे हैं उनमें डाक्टरों के नहीं पहुंचने से स्वास्थ्य सुविधाएं बेहाल पड़ी हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने आपदा के बाद संक्रामक रोगों की सुगबाहट को लेकर जो मोबाइल हेल्थ टीमें गठित की थी उनकी सेवाएं भी नहीं ली जा रही हैं। महकमे ने केवल 15 दिन तक आयुष डाक्टरों की मदद से हेल्थ टीमों को संचालित किया, लेकिन संक्रामक रोगों के मामले नियंत्रण में आते ही उन्हें वापस कर लिया गया। जिला मुख्यालय से अब कोई टीम कटे हुए क्षेत्रों में नहीं भेजी जा रही है।
सिर्फ सड़कों तक सीमित सेवाएं
स्वास्थ्य विभाग को लगभग 80 एलोपैथिक चिकित्सक केंद्र से प्रभावित क्षेत्रों के लिए मिले हैं, जबकि विभाग ने अपने लगभग 90 डाक्टर तैनात किए हैं। तैनात किए डाक्टर प्रभावित जनपदों के मुख्यालयों व सड़कों से जुड़ी सीएचसी, पीएचसी में तैनात हैं। कटे हुए क्षेत्रों में मौजूद पीएचसी में पहले हेलीकाप्टर की मदद से डाक्टर भेजे गए थे, लेकिन अब उन्हें भी वापस बुला लिया गया है।
दोबारा भेजी जाएंगी मोबाइल टीमें
आपदा प्रभावित क्षेत्रों से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आ रही शिकायतों पर अब शासन दोबारा से मोबाइल हेल्थ टीमों को सक्रिय करने जा रहा है। शासन ने मोबाइल टीमों के भेजने के आदेश स्वास्थ्य महानिदेशालय को जारी कर दिए हैं।
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