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गरीबों को आशियाना नहीं, तो नक्शा निरस्त

Sat, 10 Jan 2015 03:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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नियमों को धता बताने वाले बिल्डरों पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शिकंजा कसा है। शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार के निर्देश पर सौ बिल्डरों को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि उन्होंने अपनी समूह आवासीय योजनाओं (ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट) में निर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए कितने फ्लैट बनाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी योजना में ऐसे फ्लैट नहीं मिले तो नक्शा निरस्त किया जाएगा।
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मंत्री ने ली थी बैठक
बृहस्पतिवार को शहरी विकास मंत्री ने प्राधिकरण अधिकारियों की बैठक लेकर इस मसले पर कड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद शुक्रवार को नोटिस जारी किए गए।

यह है नियम
प्राधिकरण नियमों के अनुसार समूह आवासीय योजना में हर बिल्डर को कुल भवनों के करीब दस-पंद्रह प्रतिशत आवास निर्बल आय वर्ग के लिए बनाना अनिवार्य है। बिल्डर अपनी आवासीय योजनाओं के नक्शे में इसका जिक्र भी करते हैं, लेकिन मौके पर ये फ्लैट नहीं बनाए जाते। बनाए भी जाते हैं तो कुछ समय बाद दो फ्लैट तोड़कर एक बना दिया जाता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां बिल्डरों ने निर्बल आय वर्ग के बजाय सामान्य फ्लैट दिखाकर मोटी कमाई की है। इन शिकायतों पर ही मंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

क्या इस बार होगी कार्रवाई
प्राधिकरण इस बार बिल्डरों पर कार्रवाई करेगा, यह सवाल फिर उठने लगा है। दरअसल, इससे पूर्व भी कई बार एमडीडीए विभिन्न मामलों में बिल्डरों को नोटिस जारी कर चुका है। लेकिन हर बार आंखें दिखाने के बाद प्राधिकरण कदम खींच लेता है। हालांकि इस बार शहरी विकास मंत्री के सीधे हस्तक्षेप के चलते कुछ हद तक कार्रवाई की उम्मीद बंधी है।
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सौ बिल्डरों को नोटिस जारी किया है। इन बिल्डरों से पूछा है कि क्या उन्होंने नक्शे के अनुरूप अपार्टमेंट का निर्माण किया है। अगर किसी ने नियम तोड़ा है तो उस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
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-बंशीधर तिवारी, सचिव, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण
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