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डीएम के देरी से पहुंचने पर मेयर का 'हाईवोल्टेज ड्रामा', सीएम की बात भी नहीं मानी, धरने पर बैठे

Wed, 06 Sep 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मोथरोवाला में शराब का ठेका खोलने के विरोध में स्थानीय लोगों के साथ जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन से मिलने पहुंचे मेयर और क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली डीएम के समय से नहीं पहुंचने पर नाराज हो गए। डीएम के खिलाफ वह जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए।

यह खबर सीएम दरबार तक पहुंची तो खलबली मच गई। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मेयर से फोन पर बात की। बाद में डीएम ऑफिस छोड़कर बाहर मेयर से मिलने आए और ठेका बंद कराने का आश्वासन दिया तब जाकर मामला सुलझ पाया। करीब तीन घंटे चला यह हंगामा दिनभर शहर में चर्चाओं में रहा।
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बुधवार को मोथरोवाला में शराब का ठेका खोलने के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। धरना दे रहे ग्रामीणों को पुलिस ने धरनास्थल से उठा दिया। इसके विरोध में ग्रामीण मेयर और क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली से मिलने पहुंचे। मेयर ने मामले में पहले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर वार्ता की। फिर आबकारी मंत्री प्रकाश पंत से भी बात की।

बात नहीं बनने पर मेयर ने दोपहर तीन बजे जिलाधिकारी कार्यालय में 3:30 बजे मिलने की सूचना भेजी। ठीक समय पर मेयर ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन डीएम एसए मुरुगेशन मौजूद नहीं थे। मेयर कार्यालय में ही उनका इंतजार करने लगे। करीब पांच बजे एडीएम अरविंद पांडेय बात करने आए तो पहले ही लंबे इंतजार की वजह से नाराज मेयर ने उनसे बात करने से मना कर दिया।

करीब 5:30 बजे डीएम एसए मुरुगेशन अपने कार्यालय पहुंचे। मेयर ने लंबे इंतजार पर आपत्ति जताई तो जिलाधिकारी ने बताया कि उन्हें आपके आने की सूचना नहीं थी। इस पर मेयर तमतमा गए। उन्होंने कहा कि वह शहर के मेयर होने के साथ ही विधायक भी हैं। उन्होंने डीएम को चेताया कि लोक सेवक होने के नाते जन प्रतिनिधियों के प्रति अपने व्यवहार में सुधार लाएं। इसके बाद बात और बिगड़ गई।
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कहा, सबको पानी पिला दूंगा

गुस्साए मेयर अपने समर्थकों के साथ उनके कार्यालय से उठे और बाहर आकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीण महिलाओं ने भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। मामले की सूचना सीएम दरबार तक पहुंच गई। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से भाजपा के एक नेता ने फोन पर मेयर विनोद चमोली की बातचीत कराई। मेयर ने डीएम के व्यवहार को लेकर सीएम से आपत्ति जताई।
सीएम ने मामले में डीएम से वार्ता करने को कहा, लेकिन मेयर नहीं माने।   उनका कहना था कि जिलाधिकारी के रवैये से सरकार की फजीहत हुई है। बाद में डीएम ने एडीएम अरविंद पांडे को दोबारा वार्ता करने भेजा, लेकिन मेयर नहीं माने। आखिरकार खुद डीएम मेयर से बात करने आए और कहा कि मोथरोवाला में ठेका नहीं खुलेगा। इसके बाद मेयर माने। इस बीच आबकारी अधिकारी को हटाने के लिए नारेबाजी भी हुई। मौके पर सांसद प्रतिनिधि महेश पांडेय, विनोद रांगड़, राजपाल पयाल, महेश्वर बहुगुणा, उमेश वालिया, मंजू कोटनाला, पूनम ममगाईं, रेनू कश्यप, सतीश कश्यप, सुशील गुप्ता, महिपाल धीमान और सैकड़ों महिलाएं मौजूद थीं।

सबको पानी पिला दूंगा
मेयर जब जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे तो किसी कर्मचारी ने जोर से कहा कि मेयर साहब को पानी पिलाओ। इस पर पहले से ही गुस्साए मेयर बोले कि तुम सबको पानी पिला दूंगा। यह सुनकर कर्मचारी वहां से खिसक लिया।

मोथरोवाला क्षेत्र में पहले शराब का ठेका नहीं था। अब दो-दो ठेके खोल दिए गए। आबकारी विभाग ग्रामीणों की आवाज दबा रहा था। मैंने जिलाधिकारी को 3:30 बजे मिलने की सूचना भेजी थी। इसके बावजूद 5:30 बजे डीएम मिलने पहुंचे। साथ ही कहने लगे कि समय लेकर आना चाहिए था। डीएम का व्यवहार गलत था, जिस पर मैंने विरोध जताया। बाद में सीएम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को भी इस मामले से मैंने अवगत कराया। डीएम ने ठेका नहीं खोलने की बात मानी तो मामला सुलझ गया। -विनोद चमोली, मेयर और क्षेत्रीय विधायक

सुबह 11.30 बजे मेरी अदालत थी। इसके बाद केंद्र सरकार के अफसरों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग और फिर वन विभाग समेत अन्य अधिकारी के साथ बैठक में व्यस्त रहा। इसके बावजूद जैसे ही मुझे पता चला कि विधायक  विनोद चमोली जिलाधिकारी कार्यालय आए हैं तो मैंने उनसे मिलने के लिए एडीएम को मौके पर भेजा। लेकिन जब विधायक चमोली मुझसे वार्ता के लिए अड़ गए तो मैं खुद दफ्तर पहुंचा और उनसे अनुरोध किया कि चैंबर में चलकर बात करते हैं। विनोद चमोली मेयर होने के साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी हैं और उनसे किसी तरह की अभद्रता का सवाल ही नहीं उठता।  
-एसए मुरुगेशन, जिलाधिकारी 
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