मोथरोवाला में शराब का ठेका खोलने के विरोध में स्थानीय लोगों के साथ जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन से मिलने पहुंचे मेयर और क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली डीएम के समय से नहीं पहुंचने पर नाराज हो गए। डीएम के खिलाफ वह जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
यह खबर सीएम दरबार तक पहुंची तो खलबली मच गई। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मेयर से फोन पर बात की। बाद में डीएम ऑफिस छोड़कर बाहर मेयर से मिलने आए और ठेका बंद कराने का आश्वासन दिया तब जाकर मामला सुलझ पाया। करीब तीन घंटे चला यह हंगामा दिनभर शहर में चर्चाओं में रहा।
बुधवार को मोथरोवाला में शराब का ठेका खोलने के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। धरना दे रहे ग्रामीणों को पुलिस ने धरनास्थल से उठा दिया। इसके विरोध में ग्रामीण मेयर और क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली से मिलने पहुंचे। मेयर ने मामले में पहले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर वार्ता की। फिर आबकारी मंत्री प्रकाश पंत से भी बात की।
बात नहीं बनने पर मेयर ने दोपहर तीन बजे जिलाधिकारी कार्यालय में 3:30 बजे मिलने की सूचना भेजी। ठीक समय पर मेयर ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, लेकिन डीएम एसए मुरुगेशन मौजूद नहीं थे। मेयर कार्यालय में ही उनका इंतजार करने लगे। करीब पांच बजे एडीएम अरविंद पांडेय बात करने आए तो पहले ही लंबे इंतजार की वजह से नाराज मेयर ने उनसे बात करने से मना कर दिया।
करीब 5:30 बजे डीएम एसए मुरुगेशन अपने कार्यालय पहुंचे। मेयर ने लंबे इंतजार पर आपत्ति जताई तो जिलाधिकारी ने बताया कि उन्हें आपके आने की सूचना नहीं थी। इस पर मेयर तमतमा गए। उन्होंने कहा कि वह शहर के मेयर होने के साथ ही विधायक भी हैं। उन्होंने डीएम को चेताया कि लोक सेवक होने के नाते जन प्रतिनिधियों के प्रति अपने व्यवहार में सुधार लाएं। इसके बाद बात और बिगड़ गई।