माघ मास की मौनी अमावस्या के अवसर पर वर्ष का दूसरा लक्खी स्नान बृहस्पतिवार होने जा रहा है। स्नान और पितृकर्म का मुहूर्त पूरे दिन रहेगा।
मौनी अमावस्या नहाने वालों की भीड़ बुधवार को बहुत कम नजर आई। केवल कुमाऊं मंडल से कुछ सौ श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। पंजाब से आने वालों की संख्या भी सायंकाल तक बेहद कम रही। रात में भीड़ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रखेंगे मौन व्रत
स्नानार्थी प्रात:काल से ही मौन व्रत रखेंगे। स्नान और दान पुण्य करने के बाद तिल से बने पदार्थों को ग्रहण कर मौन व्रत तोड़ा जाएगा। कई श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक मौन रहकर साधना करते हैं।
इस दिन का खास महत्व
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से अपार पुण्य मिलता है। इस दिन यदि स्नान के बाद दान आदि किया जाए तो सुख शांति की प्राप्ति होती है।
आचार्य पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन मनु ऋषि का जन्म हुआ था। इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है।
महाराज मनु को सृष्टि संचालन माना जाता है। इस दिन मौन रहते हुए यदि किसी पवित्र नदी में स्नान किया जाए तो शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। सूर्य और चंद्रमा के गोचर वंश एक ही राशि में होने से यह दिन ऊर्जा से परिपूर्ण होता है।
घर से बाहर करें स्नान
उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति घर से बाहर धनुष मात्र की दूरी पर भी जाकर स्नान करता है तो उसे पवित्र संगम में स्नान करने के बराबर पुण्य मिल जाता है।
तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम
माघ मास में जब सूर्य मकर राशि पर आते हैं तो उस समय प्रयाग के संगम और पवित्र गंगा आदि नदियों में तीन करोड़ दस हजार तीर्थों का समागम होता है। पंडित राकेश शुक्ला ने बताया कि इसका वर्णन श्री रामचरितमानस में भी किया गया है।